शिकायत निवारण की समय-सीमा 45 दिन से घटाकर 30 दिन की गई

जन शिकायतों के निवारण की समय सीमा 45 दिन से घटाकर 30 दिन कर दी गई है। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री, डॉ जितेंद्र सिंह ने यह जानकारी देते हुए कहा कि यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कम से कम समय के भीतर शिकायतों के निपटान के साथ लोक शिकायत निवारण तंत्र के प्रभावी कार्यान्वयन पर जोर देने के कदम का एक हिस्सा है। इसमें प्रयास शिकायतकर्ता को अधिकतम संभव संतुष्टि प्रदान करना भी है।

मंत्री ने कहा, प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) द्वारा जारी एक ओएम (संचालन, प्रशासन और प्रबंधन) में यह भी कहा गया है कि एक नागरिक से प्राप्त शिकायत को तब तक बंद नहीं किया जाएगा जब तक कि उसके खिलाफ दायर अपील का निपटारा नहीं हो जाता। पिछले साल, डीएआरपीजी ने जन शिकायतों के समाधान के लिए अधिकतम समय सीमा को 60 दिनों से घटाकर 45 दिन कर दिया था।

डॉ जितेंद्र सिंह ने दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, भारत में एक प्रभावी लोक शिकायत निवारण प्रणाली को लागू करने और लोगों के बीच संतुष्टि को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रशासनिक सुधार लाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। मंत्री ने यह भी बताया कि विभिन्न मासिक “प्रगति” (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) समीक्षा बैठकों में, प्रधानमंत्री स्वयं सार्वजनिक शिकायतों की स्थिति की समीक्षा करते हैं।

डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2014 में इस सरकार के सत्ता में आने के बाद से लोगों की संतुष्टि और शिकायतों के समय पर निवारण के दोहरे कारकों के कारण लोक शिकायत के मामलों में लगभग 10 गुना वृद्धि हुई है और यह सरकार पर नागरिकों के भरोसे को भी दर्शाता है। 95 प्रतिशत से अधिक मामलों के निपटारे के साथ जन शिकायतें 2014 में 2 लाख से बढ़कर वर्तमान में 22 लाख से अधिक हो गई हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का मुख्य मंत्र अंतिम कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।

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डॉ जितेंद्र सिंह ने बताया कि नवीनतम आदेश में कहा गया है कि सीपीजीआरएएमएस पर प्राप्त शिकायतों को प्राप्त होते ही तुरंत हल किया जाएगा, लेकिन अधिकतम 30 दिनों की अवधि के भीतर और यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर निवारण संभव नहीं है, तो न्यायिक मामले/नीतिगत मुद्दों आदि जैसी परिस्थितियों में, नागरिक को एक अंतरिम/उचित उत्तर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, यह उपाय नागरिक केंद्रित शासन को आगे बढ़ाने में एक लंबा रास्ता तय करेगा क्योंकि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि शिकायतों का यथासंभव शीघ्र निपटारा किया जाए।

डॉ जितेंद्र सिंह ने बताया कि सीपीजीआरएएमएस 7.0 ने डिजिटल डैशबोर्ड का उपयोग करके बेहतर डेटा एनालिटिक्स के साथ-साथ लास्ट माइल शिकायत अधिकारियों को शिकायतों के ऑटो-रूटिंग को भी सक्षम किया है। उन्होंने कहा कि 2021 में 30,23,894 शिकायतें प्राप्त हुईं जिनमें से 21,35,923 का निपटारा किया गया, 2020 में 33,42,873  में से 23,19,569 का निपटारा किया गया, और 2019 में 27,11,455 में से 16,39,852 का निपटारा किया गया।

डीएआरपीजी ने अपने नवीनतम आदेश में सभी विभागों को नोडल शिकायत समाधान अधिकारी नियुक्त करने और जनता की शिकायतों के समाधान के लिए उन्हें पर्याप्त रूप से सशक्त बनाने के लिए कहा है। वे नोडल शिकायत समाधान अधिकारी के समग्र पर्यवेक्षण में प्राप्त जन शिकायतों की संख्या के आधार पर जितने आवश्यक समझे उतने जीआरओ नियुक्त कर सकते हैं। आदेश में कहा गया है कि शिकायत बंद होने के बाद, नागरिकों के पास अपनी प्रतिक्रिया प्रस्तुत करने और अपील दायर करने और शिकायत की गुणवत्ता पर प्रतिक्रिया प्राप्त करने का विकल्प होता है. इसके लिए एक आउटबाउंड कॉल सेंटर शुरू किया गया है। फीडबैक प्राप्त करने के लिए कॉल सेंटर द्वारा सभी नागरिकों से संपर्क किया जाएगा।

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आदेश में कहा गया है कि नागरिकों को अपील दायर करने का विकल्प प्रदान किया जाएगा यदि वे निपटाई गई शिकायत से संतुष्ट नहीं हैं और कॉल सेंटर द्वारा नागरिकों से प्राप्त फीडबैक को मंत्रालयों या विभागों के साथ साझा किया जाएगा जो फीडबैक से निपटने के लिए जिम्मेदार होंगे और इसी के आधार पर व्यवस्थागत सुधार किया जाएगा।

डीएआरपीजी ने कहा कि शिकायत समाधान के तंत्र को संस्थागत बनाने और गुणवत्तापूर्ण निपटान सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय/विभाग के सचिव वरिष्ठ अधिकारियों की बैठकों में निपटान प्रक्रिया की समीक्षा कर सकते हैं। इसके अलावा, मंत्रालय/विभाग उन शिकायतों की निगरानी भी कर सकते हैं जो प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया में उठाई जा सकती हैं।

 

एमजी/एएम/पीके

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