मंत्री पर भड़के निजी डॉक्टर ने कहा-‘अफसरों को दौड़ाकर पीट सकता हूं

मंत्री पर भड़के निजी डॉक्टर ने कहा-‘अफसरों को दौड़ाकर पीट सकता हूं

मंत्री पर भड़के निजी डॉक्टर ने कहा-‘अफसरों को दौड़ाकर पीट सकता हूं

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता को एक शिकायत मिली तो स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक निजी अस्पताल पर छापा मारते हुए जांच की. अस्पताल प्रबंधन पर आरोप था कि मरीज़ों से मनमानी रकम वसूली जा रही थी. इस जांच के दौरान अस्पताल में और भी कमियां दिखीं, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने जांच टीम के सामने कथित मरीज़ों और रिकॉर्ड्स संबंधी डिटेल्स देने में सहयोग नहीं​ किया. उल्टे अस्पताल के मैनेजर एक डॉक्टर ने सीधे तौर पर स्वास्थ्य मंत्री पर आरोप लगाए और ‘अफसरों को दौड़ाकर पीटने’ तक की बात कह डाली.

सरायकेला ज़िले के आदित्यपुर स्थित निजी अस्पताल ट्रिपल वन सेव लाइफ अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीज़ों से ज़्यादा पैसे वसूलने संबंधी शिकायतें थीं. शिकायत स्वास्थ्य मंत्री तक पहुंच चुकी थी, जिसके चलते प्रभारी सिविल सर्जन डॉक्टर वरियल मार्डी की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय टीम ने जांच की. जांच के दौरान अस्पताल में में कोविड के 7 और कैंसर का 1 मरीज़ पाया गया. लेकिन जांच के दौरान निजी अस्पताल प्रबंधन की मनमानी और अकड़ सामने आई.

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जांच में नहीं किया सहयोग

अस्पताल प्रबंधन ने जांच टीम को सहयोग देने के बजाय जांच पर ही सवाल खड़े करते हुए ​अड़ियल रवैया दिखाया. वहीं, अवैध वसूली के बारे में जब मरीज़ों के परिजनों से पूछताछ करने के लिए जांच टीम ने कहा तो किसी मरीज़ या उसके परिजन को अस्पताल प्रबंधन ने टीम के सामने पेश नहीं किया.

और भी कई गड़बड़ियां दिखीं

जांच के दौरान अस्पताल में अग्निशमन की एनओसी, प्रदूषण का सर्टिफिकेट, दर तालिका न होने जैसी कई कमियां भी पाई गईं. स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नाराज़गी ज़ाहिर की. इस जांच टीम में प्रभारी सिविल सर्जन डॉ वरियल मार्डी के अलावा डॉक्टर अनिर्बन महतो तथा धनपत महतो शामिल थे.

आपा खोकर अस्पताल मैनेजर ने निकाली भड़ास

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निरीक्षण के बाद मीडिया से बात करते हुए अस्पताल के प्रबंधक डॉ. ओपी आनंद ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और जांच पर जमकर भड़ास निकाली. आनंद ने मंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि ‘ऐसे अधिकारियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटने की क्षमता मुझमें है. लेकिन मरीज़ों की हालत गंभीर है इसलिए मैं काबू रख रहा हूं.’

जांच से नाराज़ आनंद ने उल्टा सवाल खड़ा किया कि ‘आखिर किस आधार पर स्वास्थ्य मंत्री ने दवाओं और ऑक्सीजन के दाम तय किए हैं? मैं सरकार के किसी नियम को नहीं मानता!’ अब चर्चा यही है कि स्वास्थ्य मंत्री इस मामले में क्या रुख अख्तियार करेंगे.

 

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