पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने मरुस्थलीकरण व सूखा दिवस पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने आज मरुस्थलीकरण व सूखा दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने की। मंत्रालय हर साल इस दिवस का आयोजन करता है। इसका उद्देश्य भारत और विश्व के सामने आने वाली सभी पर्यावरण संबंधित और आर्थिक चिंताओं में भूमि की महत्वपूर्ण भूमिका को समझने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता उत्पन्न करना है।

इस दिवस का आयोजन व्यक्तियों और समूहों को ऐसी पहल करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जो भूमि को स्वस्थ व उत्पादक बनाए रख सकें। इस कार्यक्रम में मरुस्थलीकरण के विभिन्न पहलुओं पर प्रस्तुतियां दी गईं। इनमें बन्नी घास के मैदान की पहले की अवस्था को प्राप्त करने के लिए की गई पहल, रेगिस्तान के भारतीय पर्यावरण-बहाली पर अनुभव, वानिकी प्रमाणन और भूमि क्षरण तटस्थता प्राप्त करना शामिल है।

केंद्रीय मंत्री ने भारत के लिए वन प्रबंधन परिषद (एफएससी) के वन प्रबंधन मानक को जारी किया। यह भारत- विशिष्ट व स्वैच्छिक वन प्रबंधन मानक है। यह विभिन्न सिद्धांतों, मानदंडों और संकेतकों के लिए वन मालिकों के तीसरे पक्ष की लेखा परीक्षा को प्रोत्साहन देगा। मरुस्थलीकरण से निपटने और वन स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए वन प्रमाणन एक महत्वपूर्ण उपकरण है। एफएससी वन प्रमाणन आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों और एसडीजी, सीबीडी, यूएनसीसीडी, यूएनएफसीसीसी और बॉन चैलेंज के तहत हमारी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की दिशा में देश के प्रयासों का समर्थन करेगा।

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पद्मश्री (2020) से सम्मानित प्रगतिशील किसान व संरक्षणवादी श्री सुंदर राम वर्मा और वन व वन्यजीव कार्यकर्ता हिम्मता राम भांभू ने मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण के प्रबंधन पर अपने ज्ञानवर्धक अनुभवों को साझा किया।

 

 

इस कार्यक्रम में मंत्रालय के वन महानिदेशक व विशेष सचिव आईएफएस श्री चंद्र प्रकाश गोयल ने मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए एक रोड मैप की विस्तृत प्रस्तुति दी। इसके बाद मंत्रालय की सचिव श्रीमती लीला नंदन ने अपना प्रमुख भाषण दिया। इन दोनों अधिकारियों ने खतरा, समग्र और एकजुट कार्य योजना की चर्चा की।

वहीं, केंद्रीय मंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि भारत पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के लिए प्रासंगिक अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों के केंद्र में भूमि क्षरण के मुद्दे को लाने में सबसे आगे रहा है। भारत ने सितंबर 2019 में संयुक्त राष्ट्र मरूस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय (यूएनसीसीडी) के पार्टियों के सम्मेलन (सीओपी 14) के 14 वें सत्र की मेजबानी की और सीओपी-15 में सूखे पर अंतर-सरकारी कार्य समूह की रिपोर्ट की सिफारिशें प्रस्तुत की। मंत्री ने प्रधानमंत्री के उस भाषण का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत, भूमि क्षरण तटस्थता (एलडीएन) की राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को प्राप्त करने और 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर खराब भूमि को फिर से पहले की अवस्था में लाने की दिशा में प्रयास कर रहा है। उन्होंने आगे कहा, “यह भूमि संसाधनों के सतत और सर्वश्रेष्ठ उपयोग पर ध्यान केंद्रित करेगा। भारत सरकार ने भूमि बहाली से संबंधित राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को प्राप्त करने की दिशा में प्रगति करने के लिए सामूहिक दृष्टिकोण अपनाया है।

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श्री यादव ने प्रधानमंत्री के एक शब्द मंत्र ‘लाइफ’ का भी हवाला दिया, जिसका अर्थ है- लाइफस्टाइल फॉर इन्वॉयरमेंट (पर्यावरण के लिए जीवनशैली)। उन्होंने टिप्पणी की कि हम सभी को अपने मौजूदा जीवन शैली के विकल्पों की जांच करने की जरूरत है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्होंने इस बात का ठोस अनुभव किया कि आज अविवेकपूर्ण व विनाशकारी उपभोग के बजाय विवेकपूर्ण व विचारपूर्ण उपयोग की जरूरत है और इसे पर्यावरण को लेकर जागरूक जीवन शैली के लिए एक जन आंदोलन बनने की जरूरत है। उन्होंने कृषि और भूमि सुधार में काम करने के लिए देशी ज्ञान के सर्वश्रेष्ठ उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने मंत्रालय से 8 अन्य संबंधित मंत्रालयों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए कहा, जो भूमि क्षरण की बहाली में शामिल हैं। मंत्री ने भूमि प्रबंधन में महिलाओं की भूमिका पर जोर दिया। मंत्री ने अपने संबोधन के समापन में कहा कि मरुस्थलीकरण का मुकाबला मिशन मोड में किया जाना चाहिए।

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एमजी/एमए/एचकेपी/सीएस

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