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बेंगलुरू में विकास परियोजनाओं के शुभारंभ के अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ

डबल इंजन सरकार ने कर्नाटका के तेज़ विकास का जो भरोसा आपको दिया है, उस भरोसे के आज हम सभी एक बार फिर साक्षी बन रहे हैं। आज 27 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास हो रहा है। ये प्रोजेक्ट Higher education, रिसर्च, skill development, health, connectivity ऐसे कई आयामों के साथ आपकी सेवा के लिए तैयार हो रहे हैं। यानि ये प्रोजेक्ट ease of living और ease of doing business, दोनों को बल देने वाले हैं।

भाइयों और बहनों,

यहां आने से पहले मैं इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस और आंबेडकर स्कूल ऑफ इक्नॉमिक्स यूनिवर्सिटी में शिक्षा, रिसर्च और इनोवेशन को बहुत समझने के लिए उनके उत्साह को अनुभव करने के लिए आज मैं उनके बीच में हूं और नई ऊर्जा लेकर के निकला हूं। मैं इन कार्यक्रमों से जुड़े देश के प्राइवेट सेक्टर की भी पूरी – पूरी प्रशंसा करता हूं। अब यहां कनेक्टिविटी से जुड़े उत्सव को आपके साथ आपके बीच आकर के और जो उमंग और उत्साह से आप लोग भरे हैं, मैं भी आपके साथ इसको  सेलिब्रेट कर रहा हूं, और आप सब जानते हैं बैंगलुरु को ये मेर आखिरी कार्यक्रम है और इसके बाद  मैसुरू जा रहा हूं। वहां भी कर्नाटका की इसी  विकास यात्रा को गति देने का अभियान जारी रहेगा। थोड़ी देर पहले कर्नाटका में 5 नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स और 7 रेलवे प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास किया गया है। कोंकण रेलवे के शत-प्रतिशत बिजलीकरण के महत्वपूर्ण पड़ाव के भी हम साक्षी बने हैं। ये सभी प्रोजेक्ट कर्नाटका के युवाओं, यहां के मध्यम वर्ग, हमारे किसान भाई-बहन, हमारे श्रमिक भाई-बहन, हमारे उद्यमियों को नई सुविधा देंगे, नए अवसर देंगे। पूरे कर्नाटका को इन विकास परियोजनाओं के लिए बहुत-बहुत बधाई। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

साथियों,

बैंगलुरू, देश के लाखों युवाओं के लिए सपनों का शहर बन गया है।  बैंगलुरू, एक भारत- श्रेष्ठ भारत की भावना का प्रतिबिंब है। बैंगलुरु का विकास, लाखों सपनों का विकास है, और इसलिए बीते 8 वर्षों में केंद्र सरकार का ये निरंतर प्रयास रहा है कि बैंगलुरू के सामर्थ्य को और बढ़ाया जाए। बैंगलुरू में अपने सपने पूरा करने में जुटे हर साथी का जीवन आसान हो, ट्रैवल टाइम कम हो, आरामदायक हो, लॉजिस्टिक कॉस्ट भी कम से कम हो, इसके लिए डबल इंजन की सरकार ने निरंतर काम किया है। यही कमिटमेंट हमें यहां आज भी देखने को मिल रहा है।

साथियों,

बैंगलुरू को ट्राफिक जाम से मुक्ति दिलाने के लिए रेल, रोड, मेट्रो, अंडर-पास, फ्लाई-ओवर, हर संभव माध्यमों पर डबल इंजन की सरकार काम कर रही है। बैंगलुरू के जो suburban इलाके हैं, उनको भी बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। मुझे बताया गया है कि बैंगलुरू के आसपास के क्षेत्रों को रेल से कनेक्ट करने के लिए 80 के दशक से ही चर्चा चल रही है। चर्चा में चालीस साल, बताइए क्या हाल है। चालीस साल चर्चा में गए हैं। मैं कर्नाटका के भाईयों-बहनों को विश्वास दिलाने आया हूं इन चीजों को साकर करने में मैं चालीस महीने मेहनत करके आपके सपनों को पूरा करुंगा। आप जानकर के हैरान हो जाएंगे, 16 साल तक ये प्रोजेक्ट फाइलों में लड़खड़ाते रहे। मुझे खुशी है कि डबल इंजन की सरकार, कर्नाटका की जनता के, बैंगलुरु की जनता के  हर सपने को भी पूरा करने के लिए जी-जान से जुटी हुई है। बैंगलुरू सब-अर्बन रेलवे से बैंगलुरू की कैपेसिटी के विस्तार में बहुत मदद मिलेगी। ये प्रोजेक्ट बैंगलुरू शहर में ही रहने की मजबूरी को कम करेगा। और मैं बताता हूं साथियों, 40 साल पहले जो काम करने चाहिए थे। जो काम 40 साल पहले पूरे होने चाहिए थे, आज मुझे वो काम 40 साल के बाद करने की, मेरे नसीब में आया है। अगर 40 साल पहले ये चीचें पूरी हुई होती ते बैंगलुरु पर दबाव न बढ़ता। बैंगलुरु और ताकत के साथ खिल उठता। लेकिन 40 साल, ये कम समय नहीं है। लेकिन साथियों आपने मुझे मौका दिया है। मैं अब समय नहीं गवाना चाहता हूं। पल-पल आपकी सेवा के लिए खपाता रहता हूं।

साथियों,

आसपास के satellite townships, सबअर्ब और ग्रामीण इलाके जब रेल आधारित रैपिड ट्रांज़िट सिस्टम से कनेक्ट हो जाएंगे तो इसका एक multiplier effect होने वाला है। सब-अर्बन रेलवे की तरह ही बैंगलुरू रिंग रोड भी शहर के congestion को कम करेगा। ये 6 नेशनल हाईवे और 8 स्टेट हाईवे को कनेक्ट करेगा। यानि कर्नाटका के दूसरे हिस्सों में जाने वाली गाड़ियों की बहुत बड़ी संख्या को बैंगलुरू शहर में एंट्री की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी। आप भी जानते हैं कि नीलमंगला से तुमकुरू के बीच का जो ये नेशनल हाईवे है, इसके इर्दगिर्द ज्यादातर इंडस्ट्रीज़ हैं। ट्रैफिक का एक बहुत बड़ा फ्लो इस रास्ते पर जाता है। इस हाईवे की Six Laning और तुमकुरु बायपास से इस पूरे क्षेत्र में ट्रैवल और ट्रांसपोर्ट आसान होगा, इक्नॉमिक एक्टिविटी को बल मिलेगा। धर्मस्थला मंदिर,सूर्य मंदिर और जोग फॉल्स जैसे आस्था और पर्यटन के अहम केंद्रों की कनेक्टिविटी को बेहतर करने के लिए जो काम हो रहा है, वो भी टूरिज्म के लिए नया अवसर बनकर आने वाला है। भी आज काम शुरु हुआ है।

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भाइयों और बहनों,

बीते 8 सालों में हमने रेल कनेक्टिविटी के complete transformation पर काम किया है। आज रेलवे में सफर का अनुभव 8 साल पहले की तुलना में बिल्कुल अलग है। भारतीय रेल अब तेज़ भी हो रही है,  स्वच्छ भी हो रही है, आधुनिक भी हो रही है, सुरक्षित भी हो रही है और citizen friendly भी हो रही है। हमने देश के उन हिस्सों में भी रेल को पहुंचाया है, जहां इसके बारे में कभी सोचना भी मुश्किल था। कर्नाटका में भी बीते वर्षों में 12 सौ लोमीटर से अधिक रेल लाइन  या तो नई बनाई हैं या फिर चौड़ीकरण हुआ है। भारतीय रेल अब वो सुविधाएं, वो माहौल भी देने का प्रयास कर रही है जो कभी एयरपोर्ट्स और हवाई यात्रा में ही मिला करती थीं। भारत रत्न  सर एम. विश्वेश्वरैया, उनके नाम पर बैंगलुरू में बना आधुनिक रेलवे स्टेशन भी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। मुझे बताया गया है कि आज बैंगलुरु में लोग इस स्टेशन पर जाते हैं, जैसे किसी टूरिस्ट डेस्टिनेशन  पर जाएं वो अजूबा देख रहे हैं। उनको देश बदलता हुआ उस रेलवे स्टेशन के रचना से दिखाई दे रहा है और लोग मुझे बता रहे थे, युवा पीढ़ी तो सेल्फी लेने के लिए कतर लगाकर खड़ी हो जाती है। ये कर्नाटका का पहला और देश का तीसरा ऐसा आधुनिक रेलवे स्टेशन है। इससे सुविधाएं तो आधुनिक हुई ही हैं, बैंगलुरु के लिए ज्यादा ट्रेनों का रास्ता भी खुला है। बैंगलुरु कैंटोनमेंट और यशवंतपुर जंक्शन को भी आधुनिक बनाने का काम आज से शुरु हुआ है।

साथियों,

21वीं सदी में हम सिर्फ रेल, रोड,पोर्ट, एयरपोर्ट तक सीमित नहीं रह सकते, बल्कि ट्रांसपोर्ट के ये मोड एक दूसरे से कनेक्ट भी हों, एक दूसरे को सपोर्ट भी करें, ऐसी मल्टीमोडल कनेक्टिविटी पर ध्यान दे रहे हैं। इस मल्टीमोडल कनेक्टिविटी को पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान से मदद मिल रही है। बैंगलुरू के पास बनने जा रहा Multi Modal Logistic Park इसी विजन का हिस्सा है। ये पार्क  पोर्ट, एयरपोर्ट, रेलवे  और रोड की सुविधाओं से कनेक्टेड होगा ताकि लास्ट माइल डिलिवरी बेहतर हो और ट्रांसपोर्टेशन की कॉस्ट कम हो। गतिशक्ति की स्पिरिट से बन रहे ऐसे प्रोजेक्ट हज़ारों युवाओं को रोज़गार भी देंगे, आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की सिद्धि को भी गति देंगे।

बहनों और भाईयों,

बैंगलुरू की सक्सेस स्टोरी 21वीं सदी के भारत को, आत्मनिर्भर भारत बनने के लिए प्रेरित करती है।इस शहर ने दिखाया है कि entrepreneurship को, innovation को, प्राइवेट सेक्टर को, देश के युवाओं को, असली सामर्थ्य दिखाने का अवसर देने से कितना बड़ा प्रभाव पैदा होता है। कोरोना के समय में बैंगलुरू में बैठे हमारे युवाओं ने पूरी दुनिया को संभालने में मदद की है। बैंगलुरू ने ये दिखा दिया है कि सरकार अगर सुविधाएं दे और नागरिक के जीवन में कम से कम दखल दे, तो भारत का नौजवान क्या कुछ नहीं कर सकता है। देश को कहां से कहां पहुंचा सकता है। बैंगलुरू, देश के युवाओं के सपनों का शहर है और इसके पीछे उद्यमशीलता है, इनोवेशन है, पब्लिक के साथ ही प्राइवेट सेक्टर की सही उपयोगिता है। बैंगलुरु उन लोगों को अपना माइंडसेट बदलने की सीख भी देता है। बैंगलुरु की ताकत देखिए ये उन लोगों को अपना माइंडसेट बदलने की सीख भी देता है।  जो अभी भी भारत के प्राइवेट सेक्टर को, private enterprise को, भद्दे शब्दों से उसको संबोधित करते हैं। देश की शक्ति को, करोड़ों लोगों के सामर्थ्य को ये सत्तावदी मानसिकता वाले लोग कमतर आंकते हैं।

साथियों,

21वीं सदी का भारत wealth creators, job creators का है, innovators का है। यही दुनिया के सबसे युवा देश के रूप में भारत की असली ताकत भी है, यही हमारी संपदा भी है। इस ताकत को प्रमोट करने के लिए जो प्रयास बीते 8 सालों में हुए हैं, उनकी चर्चा तो होती है, लेकिन बहुत सीमित दायरे में होती है। लेकिन बैंगलुरू जो इस कल्चर को जीता है, वहां जब मैं आया हूं तो इसकी विस्तृत चर्चा करना मैं अपनी ज़िम्मेदारी समझता हूं।

भाइयों और बहनों,

भारत में खेती के बाद सबसे बड़ा अगर employer है तो MSME सेक्टर है हमारा, जो देश के टीयर-2, टीयर-3 शहरों की इकॉनॉमी को बहुत बड़ी ताकत दे रहा है। MSMEs इस सेक्टर से देश के करोड़ों लोग जुड़े हुए हैं। लेकिन हमारे यहां MSMEs की परिभाषा ही ऐसी रखी गई थी कि अगर वो खुद का विस्तार करना चाहते थे, तो उनको नुकसान होता था। इसलिए वो अपने venture को बड़ा करने के बजाय, दूसरे छोटे उपक्रम की तरफ ले जाते थे। हमने इस परिभाषा को ही बदल दिया, ताकि MSMEs ग्रोथ की तरफ बढ़े, ज्यादा employment बढ़ाए। छोटे-छोटे सरकारी प्रोजेक्ट्स में भी ग्लोबल टेंडर्स होने से हमारे MSMEs के अवसर बहुत सीमित होते थे। हमने  200 करोड़ रुपए तक के टेंडर में विदेशी इकाइयों की भागीदारी को समाप्त कर दिया। यही तो आत्मनिर्भर भारत के प्रति  हमारा आत्मविश्वास है। केंद्र सरकार के सभी विभागों के लिए  25 प्रतिशत खरीद MSMEs से ही करने का भी निर्देश दिया गया है। यही नहीं आज Government e-marketplace के रूप में MSMEs के लिए देश के हर सरकारी विभाग, सरकारी कंपनी, डिपार्टमेंट्स के साथ सीधे ट्रेड करने का आसान माध्यम दिया गया है। GeM पर आज  45 लाख से अधिक seller अपने प्रोडक्ट और अपनी सर्विस  उपलब्ध करा रहे हैं।

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भाइयों और बहनों,

भारत के स्टार्ट अप इकोसिस्टम की भी बहुत चर्चा आजकल हो रही है, जिसका बैंगलुरू बहुत बड़ा सेंटर है। बीते 8 सालों में देश ने कितना बड़ा काम किया है, ये तब समझ में आएगा जब हम अतीत के दशकों को देखेंगे। बीते दशकों में देश में कितनी बिलियन डॉलर कंपनियां बनी हैं, आप उंगलियों पर गिन सकते हैं। लेकिन पिछले 8 साल में 100 से अधिक बिलियन डॉलर कंपनियां खड़ी हुई हैं, जिसमें हर महीने नई कंपनियां जुड़ रही हैं। 8 साल में बने  इन यूनिकॉर्न्स की valuation आज लगभग डेढ़ सौ अरब डॉलर है यानि करीब-करीब 12 लाख करोड़ रुपए है। देश में स्टार्ट अप इकोसिस्टम कैसे बढ़ रहा है ये बताने के लिए मैं आपको एक और आंकड़ा देता हूं। 2014 के बाद पहले 10 हज़ार स्टार्ट अप्स तक पहुंचने में हमें लगभग 800 दिन लगे।  मैं  दिल्ली में आपने मुझे  सेवा करने के लिए बिठाया उसकी बात करता हूं, उसके बाद की। लेकिन हाल में जो 10 हज़ार स्टार्ट अप इस इकोसिस्टम में जुड़े हैं,  वो 200 दिन से भी कम में ही जुड़े हैं। तभी बीते 8 साल में हम कुछ सौ स्टार्ट अप्स से बढ़कर आज 70 हज़ार के पड़ाव को पार कर चुके हैं।

भाइयों और बहनों,

स्टार्ट अप्स और इनोवेशन का रास्ता आराम का, सुविधा का नहीं है। और बीते 8 सालों में देश को इस रास्ते पर तेज़ी से बढ़ाने का रास्ता भी आसान नहीं था, सुविधा का नहीं था। कई फैसले, कई रिफॉर्म तात्कालिक रूप से अप्रिय लग सकते हैं,  लेकिन समय के साथ उन रिफॉर्म्स का लाभ आज देश अनुभव करता है। रिफॉर्म का रास्ता ही हमें नए लक्ष्यों, नए संकल्पों की तरफ ले जाता है। हमने स्पेस और डिफेंस जैसे हर उस सेक्टर को युवाओं के लिए खोल दिया है, जिनमें दशकों तक सिर्फ सरकार का एकाधिकार था। आज हम ड्रोन से लेकर एयरक्राफ्ट तक, हर cutting edge technology में भारत के युवाओं को प्रोत्साहित कर रहे हैं।  यहां देश का गौरव ISRO है, DRDO का एक आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर है। आज हम देश के युवाओं से कह रहे हैं कि सरकार ने जो ये वर्ल्ड क्लास सुविधाएं बनाई हैं, इनमें अपने विजन को, अपने आइडिया को टेस्ट करें। केंद्र सरकार युवाओं को हर ज़रूरी प्लेटफॉर्म दे रही है, इनमें देश का युवा मेहनत कर रहा है। जो सरकारी कंपनियां हैं वो भी कंपीट करेंगी, देश के युवाओं की बनाई कंपनियों के साथ कंपीट करेंगी। तभी हम दुनिया के साथ कंपीट कर पाएंगे। मेरा साफ मानना है, उपक्रम चाहे सरकारी हो या फिर प्राइवेट, दोनों देश के asset हैं, इसलिए level playing field सबको बराबर मिलना चाहिए। यही सबका प्रयास है। सबका प्रयास का यही मंत्र आजादी के अमृतकाल यानि आने वाले 25 साल में आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की ऊर्जा है। एक बार फिर सभी कर्नाटका वासियों को विकास के इन प्रोजेक्ट्स के लिए बधाई देता हूं, और बंसवराज जी के नेतृत्व में हमारा कर्नाटक औरे तेजी से आगे बढ़े इसके लिए भारत सरकार कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए आपके साथ खड़ी हुई है। अनेक – अनेक शुभकामनाओं के साथ आप सबको बहुत – बहुत धन्यवाद, नमस्कारा।

 

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DS/TS/DK/AK

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