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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर रक्षा मंत्री ने लोगों से शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से योग का अभ्यास करने की अपील की

केद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने लोगों से शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से योग का अभ्यास करने की अपील की है। वह वर्चुअल रूप से 21 जून, 2022 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर श्री सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक समारोह को संबोधित कर रहे थे। प्राचीन भारतीय अभ्यास के लाभों पर प्रकाश डालते हुए रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि योग शारीरिक फिटनेस प्राप्त करने का केवल एक अच्छा साधन भर नहीं है बल्कि सांसारिक अस्तित्व में अंतर्निहित व्याकुलता और भ्रम को दूर करने के जरिये किसी व्यक्ति को खुद से जोड़ने का एक तरीका भी है। उन्होंने कहा कि योग अभ्यास विचारों और भावनाओं को नियंत्रित करने और उन्हें सकारात्मक दिशा में प्रशिक्षित करने में हमारी सहायता करता है।

श्री राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि पिछले कुछ वर्षों में योग ने अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति के स्तर पर नई ऊंचाइयों को छुआ है और आज यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सक्षम दिशा निर्देश तथा लोगों के सक्रिय सहयोग के माध्यम से भारत की नई पहचान बन गया है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से योग दिवस मनाने की अपील की थी। संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस प्रस्ताव को स्वीकार किया जाना निश्चित रूप से मानवता के कल्याण की दिशा में एक बड़ा कदम था। योग को विश्वव्यापी ख्याति उस वक्त और प्राप्त हुई जब 01 दिसंबर, 2016 को इसे यूनेस्को द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिध सूची में शामिल किया गया।”

रक्षा मंत्री ने श्री सद्गुरु तथा ईशा फाउंडेशन द्वारा पर्यावरणीय समस्याओं को दूर करने के लिए प्रेरित करने के अतिरिक्त लोगों को योग के माध्यम से अधिक प्रसन्नचित्त तथा अधिक सार्थक जीवन जीवन जीना सिखाने के लिए किए जा रहे कार्यों के लिए उनकी सराहना की। उन्होंने कहा, ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम” का संदेश देकर भारत ने अपनी सीमा के भीतर रहने वाले लोगों को ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लोगों को अपना परिवार माना है। श्री सद्गुरु ने अपने काम से निश्चित रूप से एक नया पर्यावरण आंदोलन पैदा करने के लिए ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना को जीवंत बनाया है। उन्होंने कहा, ‘‘वह मिट्टी बचाओ” जैसे अभियानों तथा अध्यात्मिकता के माध्यम से दिव्य संदेश दे रहे हैं।”

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श्री राजनाथ सिंह ने पर्यावरण के क्षरण पर चिंता जताई और कहा कि पृथ्वी के इकोसिस्टम का निर्माण इस तरह से किया गया है कि किसी एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में प्रभाव केवल उसी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता बल्कि यह पूरे विश्व को सन्निहित कर लेता है। उन्होंने कहा, ‘‘उदाहरण के लिए हमारे सामने कार्बन उत्सर्जन का मामला है। भले ही यह एक देश में हो रहा हो, निश्चित रूप से यह अन्य सभी देशों को प्रभावित कर रहा है। यही कारण है कि वैश्विक पर्यावरण सुरक्षा के संबंध में, सभी शिखर सम्मेलन, सम्मेलन, संधियां तथा समझौते, चाहे वह रियो समिट हो या डेजर्टिफिकेशन से मुकाबला करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, जलवायु परिवर्तन कन्वेंशन, क्योटो प्रोटोकॉल या पेरिस सम्मेलन, वे सभी समान रूप से एक सुर में कार्य करने के लिए विश्व के सभी देशों का मार्गदर्शन करते हैं। एक जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में, भारत ने अपनी परंपरा और संस्कृति से निर्देशित होकर निरंतर मृदा संरक्षण क लिए कार्य किया है। केवल मिट्टी पर ध्यान केंद्रित करने के जरिये मृदा संरक्षण नहीं किया जा सकता। हमने इससे जुड़े सभी घटकों जैसे वनीकरण, वन्य जीवन, आर्द्र भूमि आदि को संरक्षित करने और बढ़ाने का कार्य किया है। केवल सामूहिक प्रयासों से ही सामूहिक समस्याओं का निदान संभव होगा। इसलिए, यह आवश्यक है कि हम सभी मिट्टी और पर्यावरण की रक्षा करने का प्रयास करें और एक साथ मिल कर एक बेहतर विश्व की ओर बढ़ें।”

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रक्षा मंत्री ने विज्ञान के क्षेत्र में नई प्रौद्योगिकीयों को खोजने तथा ऐसे नवोन्मेषण करने की अपील की जो पर्यावरण के अनूकूल मूल्यों को बनाये रखेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘हमें प्रकृति का साथी बन जाना चाहिए तथा जीवों के साथ साथ प्रकृति के निर्जीव तत्वों के प्रति भी श्रद्धा और सम्मान की भावना रखनी चाहिए। मुझे पूरा विश्वास है कि धीरे धीरे मानव सभ्यता हमारे समय की पर्यावरण संबंधित समस्याओं को दूर करेगी तथा हम सभी के लिए एक खुशहाल, समृद्ध, न्यायसंगत तथा टिकाऊ भविष्य का निर्माण करेगी।”

श्री राजनाथ सिंह ने ‘मिट्टी बचाओ’ अभियान को उम्मीद की किरण बताया क्योंकि इससे यह विश्वास पैदा होता है कि इस अभियान के माध्यम से विश्व भर के लोग आने वाले समय में मृदा के स्वास्थ्य को बनाये रखने में योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि यह अभियान न केवल मिट्टी की रक्षा करने बल्कि मानव सभ्यता एवं संस्कृति को संरक्षित करने का भी एक प्रयास है। 

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एमजी/एएम/एसकेजे/रवाईबी

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