Indian Railways : वंदे भारत ट्रेन का परीक्षण कोटा में 28 से, 180 की रफ्तार से दौड़ेगी

Indian Railways : वंदे भारत ट्रेन का परीक्षण कोटा में 28 से, 180 की रफ्तार से दौड़ेगी

Indian Railways : वंदे भारत ट्रेन का परीक्षण कोटा में 28 से, 180 की रफ्तार से दौड़ेगी

Kota Rail News : वंदे भारत ट्रेन के अपग्रेडेड दूसरे वर्जन का परीक्षण भी कोटा मंडल में होगा। यह परीक्षण 28 अगस्त से शुरु हो सकता है। परीक्षण के दौरान ट्रेन को अधिकतम 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ आ जाएगा। परीक्षण के बाद ट्रेन को देश के विभिन्न रेल खंडों पर 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाने की तैयारी है। इन रेल खंडों में कोटा-जयपुर भी शामिल है। साथ ही वंदे भारत ट्रेन कोटा-निजामुद्दीन के बीच दौड़ रही जनशताब्दी की जगह भी ले सकती है। इसका मुख्य कारण ट्रेन को अधिकतम 5 घंटे के रूट पर दौड़ाने को माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि वंदे भारत ट्रेन को सबसे अधिक रफ्तार से दौड़ने का खिताब मिला है।
उल्लेखनीय है कि वंदे मातरम ट्रेन का पहला वर्जन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दिल्ली-कटरा और दिल्ली-वाराणसी के बीच दौड़ रहा है।
दौड़ेंगी 75 वंदे भारत ट्रेन
रेलवे की योजना अगले साल 15 अगस्त तक 75 वंदे भारत ट्रेन दौड़ाने की योजना है। एक ट्रेन इसी साल 15 अगस्त को दौड़ सकती है। चेन्नई स्थित आईसीएफ फैक्ट्री में हर महीने 6 से 7 वंदे भारत ट्रेनें बनाई जा रही हैं। जरुरत होने पर इस संख्या को 10 तक बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा वंदे भारत ट्रेनों का निर्माण कपूरथला में रेल कोच फैक्ट्री और रायबरेली में मॉडर्न कोच फैक्ट्री में भी किया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि इसके बाद रेलवे की योजना वंदे भारत ट्रेन के तीसरे वर्जन लाने की भी है। अधिकतम रफ्तार 220 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।
कार्यों ने बताया कि कि अपग्रेडेड वंदे भारत ट्रेन में अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। इसकी तकनीक भी बेहतर होंगी। अभी जो ट्रेन में सस्पेंशन या स्प्रिंग है, वह मेटल का बना होता है। वंदे भारत-2 में एयर स्प्रिंग लगाए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि कोच की बॉडी और कोच के व्हील के बीच स्प्रिंग लगे होते हैं जो कि शॉक आबजर्बर का काम करते हैं। एयर स्प्रिंग लग जाने से ट्रेन की राइड क्वालिटी काफी बेहतर हो जाएगी।
पहले वर्जन का परीक्षण भी कोटा में हुआ था
उल्लेखनीय है कि वंदे भारत ट्रेन के पहले वर्जन का परीक्षण भी 2018 में कोटा मंडल में हुआ था। उस समय भी ट्रेन को अधिकतम 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाया गया था।

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