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सोमवार , सितम्बर 20 2021
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चार साल तक पूरा होगा ट्रेेनों की रफ्तार बढ़ाने का प्रोजेक्ट दिल्ली -मुंबई रेलमार्ग,राष्ट्रीय रेल योजना में शामिल किया-गंगापुर सिटी

180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन के परीक्षण पूरा

180 से ट्रेन का परीक्षण हुआ पुरा, 9 दिन पहले खत्म हुआ काम-गंगापुर सिटी

कोटा मंडल में 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन के परीक्षण सोमवार को पूरा हो चुका है। यह काम  पहले ही पुरा हो गया। परीक्षण टीम एक-दो दिन में कोटा से लौट जाएगी। एक गाय टकराने की घटना को छोड़कर अधिकारियों ने ट्रेन के परीक्षण को पूरी तरह सफल बताया है। अब इस परीक्षण की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में कोटा मंडल में 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन दौड़ाने का खाका तैयार किया जाएगा। आखिरी दिन भी महितपुर और शामगढ़ के बीच विभिन्न रफ्तार पर ट्रेन का परीक्षण किया गया। उल्लेखनीय है कि ट्रेन का परीक्षण 15 दिसंबर से शुरु हुआ था। यह परीक्षण 6 जनवरी तक किया जाना था। परीक्षण का काम नागदा से कोटा तक ही पूरा हो गया। हालांकि यह परिक्षण लबान तक किया जाना था। ट्रेन का परीक्षण 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाकर भी किया गया। परीक्षण के दौरान ट्रेन को तीन-चार बार 180 की रफ्तार से दौड़ाई गई। ऐसा कर कोटा मंडल ने एक इतिहास रचा है। कोटा मंडल में यह पहला अवसर रहा जब किसी ट्रेन को 180 की  रफ्तार से दौड़ाया गया। हालांकि इससे पहले कोटा मंडल में परीक्षण के दौरान वंदेमातरम ट्रेन 180 की रफ्तार से दौड़ाया जा चुका है। लेकिन यह एक विशेष ट्रेन थी इसका इंजन कोच के साथ ही लगा था। अलग से इंजन लगाकर ट्रेन को 180 की रफ्तार से दौड़ाने का कोटा मंडल में यह पहला अवसर है। ट्रेनों को कर दिया जाता था खड़ी180 की रफ्तार से ट्रेन दौड़ाते समय एतियात के तौर पर पास की लाइन से गुजरने वाली ट्रेनों को खड़ा कर दिया जाता था। इसके अलावा सभी पाइंटों को क्लेंप भी किया जाता था। ताकि तेज रफ्तार ट्रेन के समय पाइंट गड़बड़ाए नहीं और किसी अनहोनी की आशंका से बचा जा सके।आरडीएसओ ने किया परीक्षण<स्रद्ब1>यह परीक्षण लखनऊ स्थित अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा किया गया है। परीक्षण के लिए आरडीएसओ के अधिकारी अपने साथ दो कोचों की स्पेशल ट्रेन भी लाए थे। यह विस्टाडोम कोच हैं। इन्हें भारत में ही तैयार किया गया है। यह कोच चारों तरफ से पारदर्शी हैं। कोच की छत पर भी कांच लगे हैं।

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