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दोगुना किराया देकर भी नारकीय सफर को मजबूर यात्री, आगरा फोर्ट ट्रेन में चार दिन में एक बार लगती है झाड़ू, शौचालय के टूटे दरवाजे, नलों से टोटियां गायब

दोगुना किराया देकर भी नारकीय सफर को मजबूर यात्री, आगरा फोर्ट ट्रेन में चार दिन में एक बार लगती है झाड़ू, शौचालय के टूटे दरवाजे, नलों से टोटियां गायब

दोगुना किराया देकर भी नारकीय सफर को मजबूर यात्री, आगरा फोर्ट ट्रेन में चार दिन में एक बार लगती है झाड़ू, शौचालय के टूटे दरवाजे, नलों से टोटियां गायब
कोटा।  रेलवे ने कुछ ट्रेनों को भले ही नियमित रूप से चलाना शुरु कर दिया हो लेकिन इनका किराया अभी भी दो से तीन गुना तक वसूला जा रहा है। लेकिन इसके बाद भी यात्री नारकीय सफर को मजबूर हैं। ट्रेनों में अव्यवस्थाओं की कई शिकायतें रेलवे को रोज मिल रही हैं, लेकिन इसके बाद भी व्यवस्थाओं में सुधार नजर नहीं आ रहा है। कोटा मंडल से गुजरने और चलने वाली कई गाड़ियों का भी यही हाल है।
सबसे बुरा हाल रतलाम-आगरा फोर्ट हल्दीघाटी पैसेंजर ट्रेन (05911-12) का है। पैसेंजर होने के बावजूद भी इस ट्रेन को अभी भी स्पेशल के रूप में ही चलाया जा रहा है। इस ट्रेन का रखरखाव कोटा मंडल द्वारा ही किया जाता है। इस ट्रेन के चार रैक हैं। एक रैक का रखरखाव 4 दिन में एक बार होता है। ट्रेन की सफाई तक भी चार दिन में एक बार होती है। कोचों के टूटे कलपुर्जे भी चार दिन में एक बार ही बदले जाते हैं। इस दौरान यात्री गंदगी में और सुविधाओं के अभाव में यात्रा करने को मजबूर होते हैं।
टूटा शौचालय का दरवाजा
यात्री धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गुरुवार को आगरा से कोटा आते समय उसके कोच के शौचालय का दरवाजा टूटा हुआ था। इसी तरह रविवार को कोटा से वापस आगरा जाने के दौरान उसके कोच की नलों टूटियां गायब थीं। वाशबेसिन जाम थे। इसके चलते वाशबेसिन में गंदा पानी भरा हुआ था। ट्रेन चलने के साथ ही यह गंदा पानी चला कर कोच में गिर रहा था। सफाई नहीं होने के कारण कोच में गंदगी का अंबार था। गंदगी के कारण कोच में बदबू आ रही थी। इन अव्यवस्थाओं के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
दोगुना किराया वसूल रही रेलवे
धर्मेंद्र ने बताया कि इन अव्यवस्थाओं के बावजूद भी रेलवे द्वारा इस ट्रेन में यात्रियों से दोगुने से ज्यादा किराया वसूला जा रहा है। कोरोना से पहले इस ट्रेन में कोटा से आगरा तक स्लीपर श्रेणी का किराया 105 रुपए था। अब 225 रुपए वसूले जा रहे हैं। रेलवे ने किराया तो बढ़ा दिया, लेकिन सुविधाएं घटा दीं।

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