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रेलवे की बेकार पड़ी करोड़ों की भूमि-गंगापुर सिटी

कोटा की बजाए गंगापुर सिटी में लगे इलेक्ट्रिक लोको शेड गंगापुर सिटी में रेलवे की बेकार पड़ी करोड़ों की भूमि-गंगापुर सिटी

कोटा में एसी इलेक्ट्र्रिक लोको शेड के निर्माण की योजना प्रस्तावित है। इस पर करीब 128.57 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। पश्चिम मध्य रेलवे की ओर से इसका प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है। बजट में इसे स्वीकृति मिली तो इसकी विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाएगी। इस शेड में हर माह 100 लोको के रख रखाव की क्षमता होगी। इस शेड के निर्माण पर 82.19 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। यदि कोटा की बजाए अगर यह इलेक्ट्रिक लोको शेड गंगापुर सिटी में बनाया जाए तो रेलवे को करोड़ों रुपए की बचत होगी। साथ ही गंगापुर सिटी में पड़ी अरबों रुपए की बेकार रेलवे की जमीन का सद्उपयोग हो सकता है।
सूत्रों के अनुसार कोटा में इलेक्ट्रिक लोको शेड लगाने के लिए जमीन तक नहीं है। जबकि गंगापुर सिटी में जमीन उपलब्ध है। गंगापुर में यदि शेड बनता है तो रेलवे को अरबों रुपए की जमीन मुफ्त में मिलेगी। जो कोटा में पैसों से खरीदी जाएगी। जिससे रेलवे को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।इसके अलावा शेड में जो कर्मचारियों व रेलवे अधिकारियों जो काम करेंगे तो कोटा में 16 प्रतिशत मकान किराया भत्ता दिलाया जावेगा। जबकि अगर यह शेड गंगापुर में स्थापित किया जाता है तो कर्मचारियों को 8 प्रतिशत ही मकान किराया दिया जाएगा। जिससे रेलवे को करोड़ों रुपयों का मकान किराया भत्ता कम देना पड़ेगा। जबकि कोटा में बनता है तो मकान भत्ता दुगुना दिया जाएगा। जिससे रेलवे को भी आर्थिक नुकसान होगा। तथा जनता पर भी कर का बोझ बढ़ेगा।
लोको शेड जर्जर पड़ा, जबकि देश में पहला स्थान था :किसी समय यात्रियों की चहल-पहल और कर्मचारियों की ऊर्जा से जीवंत रहने वाला गंगापुर सिटी का लोको शेड आज जर्जर हाल में है। लोको शेड जर्जर होने के बाद रेलवे की करोड़ों रुपए की जमीन भी बेकार पड़ी हुई है। जब तक यह लोको शेड काम करता था यहां से सौ से अधिक स्टीम इंजन संचालित किए जाते थे।यह बात भी महत्त्वपूर्ण है कि एक दौर था जब इस लोको शेड में तैयार किए गए स्टीम इंजन ने अखिल भारतीय स्तर पर हुई रेल इंजन रेस में देश भर में पहला स्थान हासिल किया था। इंजन मरम्मत के लिए लगभग दो हजार कर्मचारी कार्य करते थे। इसी प्रकार कैरिज डिपो से मालगाड़ी के डिब्बों की मरम्मत कार्य के लिए एक हजार से अधिक कर्मचारी कार्य करते थे। कैरिज के अधिकांश कर्मचारियों को दूसरे स्थान पर भेजे जाने से अब यहां नाम मात्र के कर्मचारी ही रह गए हैं। लोको शेड पूरी तरह वीरान हो गया है, कैरिज डिपो के भी अब यही हाल होने को लगते हैं।

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