Indian Railways : अंडर ब्रिज की निकाली गर्डर, बिछाई पटरी, जीएम आने से पहले किया काम

Indian Railways : अंडर ब्रिज की निकाली गर्डर, बिछाई पटरी, जीएम आने से पहले किया काम

Indian Railways : कोटा-डकनिया अंडर ब्रिज की निकाली गर्डर, बिछाई पटरी, जीएम आने से पहले किया काम

Kota Rail News : कोटा-डकनिया के बीच निर्माणाधीन अंडर ब्रिज की दोनों गर्डरों को मंगलवार को निकाल लिया गया। गर्डर निकालने के बाद अब रेल पटरियों को सीधा सीमेंट कंक्रीट के बॉक्स पर बिछा दिया है।
गर्डर निकलने के लिए 4-4 घंटे का मेघा ब्लॉक लिया गया था। ब्लॉक के दौरान दौरान कई ट्रेनें प्रभावित रहीं। रास्ते में ट्रेन अटकने से यात्री परेशान रहे। हालांकि रेलवे द्वारा इसकी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी।
अधिकारियों ने बताया कि गर्डर निकालने के लिए भारी-भरकम दो क्रेनों को काम में लिया गया था। रामगंजमंडी से भी बड़ी संख्या में ट्रैकमेंटेनर बुलाए गए थे। ठेका सहित 50-60 कर्मचारी इस काम में जुटे हुए थे। पिछली घटनाओं से सबक लेते हुए मौके पर अपर मंडल रेल प्रबंधक सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
अधिकारियों ने बताया कि इसी के साथ इस अंडर ब्रिज का मुख्य काम पूरा हो गया है। बाकी काम पूरा होने के बाद संभवत इसी महीने इस अंडर ब्रिज को चालू कर दिया जाए।
जीएम आने से पहले किया काम
सूत्रों ने बताया कि पश्चिम-मध्य रेलवे महाप्रबंधक (जीएम) सुधीर गुप्ता के कोटा आने की जानकारी के बाद इस काम को तुरंत करने का निर्णय लिया गया। उल्लेखनीय है कि गुप्ता बुधवार को कोटा मंडल के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान गुप्ता अंडर ब्रिज का भी निरीक्षण कर सकते हैं।
गौरतलब है कि इस अंडर ब्रिज का काम नगर विकास न्यास (यूआईटी) द्वारा किया जा रहा है। रेलवे द्वारा यहां पर संरक्षा संबंधित काम देखा जा रही है।
ट्रेकमैन की हो चुकी है मौत
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष 3 मई को काम के दौरान इस अंडर ब्रिज की मिट्टी ढहने से एक ट्रैकमेंटेनर वसीम की मौत हो गई थी। इसके बाद से यह काम बंद था। पिछले महीने ही यह काम दोबारा शुरू हुआ था।
गौरतलब है कि इस अंडर ब्रिज में पहले नियम विरुद्ध छोटी गर्डर डाली गई थी। वसीम की मौत के लिए इस छोटी गर्डर को भी जिम्मेदार माना जा रहा था। छोटी गर्डर के कारण मिट्टी ढहने की बात सामने आई थी।
यह मामला सामने आने के बाद रेलवे ने रातों-रात इन छोटी गर्डरों को गायब कर दिया था। इसके बाद यहां पर ड्राइंग के अनुसार बड़ी गर्डरें डाली गई थीं।
इन बड़ी गर्डर के ऊपर पटरियां को रखा गया था। इसके बाद नीचे सीमेंट कंक्रीट के बॉक्स जमाए गए थे।
अधिकारियों पर आज तक नहीं हुई कार्रवाई
गौरतलब है कि वसीम की मौत के दिन कई अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे। लेकिन कोई कार्रवाई तो दूर प्रशासन ने आज तक इन अधिकारियों को चार्ज शीट तक थमाना जरूरी नहीं समझा। उल्टा इस घटना के बाद प्रशासन ने पदोन्नति कर दो सुपरवाइजरों को सहायक मंडल इंजीनियर तक बना दिया। इसमें से एक को तुरंत पोस्टिंग भी दे दी गई। दूसरे का मामला अटका हुआ है।
शासन की नियत पर उठे सवाल
ट्रैकमैन की मौत के बाद भी अधिकारियों पर कोई कार्यवाही नहीं होने से प्रशासन की नियत पर लगातार सवाल उठ हैं। कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रशासन के इस निर्णय की आलोचना भी की थी।
मामले में वसीम के परिजनों ने पुलिस थाने में अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी, लेकिन इस मामले में भी आज तक कुछ नहीं हो सका है।

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