कोटा/मुंबई। भारतीय रेलवे के रनिंग स्टाफ में काम के बढ़ते दबाव और खराब वर्किंग कंडीशन को लेकर विद्रोह की स्थिति पैदा हो गई है। जहाँ मध्य रेलवे (सेंट्रल रेलवे) के मुंबई डिवीजन में 65 मेल लोको पायलटों ने एक साथ स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) की मांग कर सनसनी फैला दी है, वहीं कोटा मंडल में भी स्टाफ की कमी और मानसिक प्रताड़ना के चलते हालात विस्फोटक बने हुए हैं।
मुंबई डिवीजन के 65 लोको पायलटों ने सोमवार को डीआरएम (DRM) को एक सामूहिक आवेदन सौंपा। पायलटों का कहना है कि यह समस्या केवल एक मंडल की नहीं, बल्कि पूरे भारतीय रेलवे की है। आवेदन में तनाव के मुख्य कारण गिनाए गए हैं:
अमानवीय स्थितियाँ: खराब गुणवत्ता का खाना और आराम की अपर्याप्त सुविधाएँ।
स्वास्थ्य पर असर: अनियमित ड्यूटी के कारण बिगड़ता स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन का पूरी तरह खत्म होना।
असुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर: तकनीकी खामियों के बीच असुरक्षित माहौल में काम करने का दबाव।
कोटा मंडल में भी लोको पायलटों का धैर्य जवाब दे रहा है। यहाँ 170 से अधिक पद खाली होने के कारण मौजूदा स्टाफ पर काम का भारी बोझ है। रेलवे एम्पलाई यूनियन के महामंत्री मुकेश गालव ने पश्चिम-मध्य रेलवे (WCR) महाप्रबंधक को पत्र लिखकर कोटा-सागर खंड के कुप्रबंधन पर कड़ा रोष जताया है।
यूनियन द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दे:
नियम विरुद्ध आदेश: भोपाल मंडल द्वारा कोटा के स्टाफ पर जबरन नए नियम थोपे जा रहे हैं।
जबरन ड्यूटी: गुना रनिंग रूम में 12 घंटे विश्राम के बाद भी स्टाफ को घर भेजने के बजाय जबरन सागर भेजा जा रहा है।
लगातार वर्किंग: पिछले तीन महीनों में ऐसे 13 मामले सामने आए हैं जहाँ स्टाफ की मुख्यालय वापसी 72 घंटे के बाद हुई है, जबकि 99 मामलों में वापसी में 60 से 72 घंटे लगे।
धमकी भरा माहौल: छोटी बातों पर सस्पेंड करने या 'बुक ऑफ' कर भोपाल भेजने की धमकियाँ दी जा रही हैं।
क्रैक वर्किंग पर रोक: गुना रेलखंड में कोटा स्टाफ से नियम विरुद्ध क्रैक वर्किंग तुरंत बंद हो।
36 घंटे में वापसी: आउट स्टेशन रेस्ट को कम कर स्टाफ को अधिकतम 36 घंटे में कोटा मुख्यालय वापस लाया जाए।
पदोन्नति: स्टाफ की कमी दूर करने के लिए पात्रता सूची में शामिल कर्मचारियों को तत्काल प्रमोशन दिया जाए।
गुना लॉबी पर अंकुश: कोटा स्टाफ पर गुना-सागर खंड में रास्ते की गाड़ियां चलाने का दबाव बंद किया जाए।
निष्कर्ष: लोको पायलटों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इन विसंगतियों को दूर नहीं किया, तो भविष्य में रेल संचालन और सुरक्षा दोनों पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
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