Rajasthan Election 2023 : राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी पार्टी के निर्देश मानेंगी

तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में अकेले पीएम मोदी की प्रतिष्ठा दांव पर थी।
राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी पार्टी के निर्देश मानेंगी।
भाजपा संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी का सम्मान।
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कल्पना कीजिए कि राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनाव परिणाम 2018 वाले होते तो इस बार विपक्ष की क्या प्रतिक्रिया होती? राहुल गांधी से लेकर ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, अशोक गहलोत, नीतीश कुमार, महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला आदि विपक्षी नेता यही कहते कि अब मोदी का जादू खत्म हो गया है और 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष की जीत होगी। इन तीनों हिंदी भाषी राज्यों की हार का ठीकरा सीधे मोदी पर फोड़ा जाता। 2018 के नतीजे न आए इसके लिए पीएम मोदी ने तीनों राज्यों में मेहनत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। संभाग ही नहीं जिला स्तर पर जाकर चुनावी सभा और रोड शो किए। इन तीनों प्रदेशों के लोगों को भरोसा दिलाया कि उनका वोट मोदी की मजबूती के काम आएगा। राजस्थान में तो मोदी ने कहा कि मैं गारंटी देता हंू कि अशोक गहलोत फिर से मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। कहा जा सकता है कि तीन प्रदेशों में मोदी ने अपनी प्रतिष्ठा को दांव पर लगा दिया। इन प्रदेशों के भाजपा के कुछ नेता माने या नहीं, लेकिन मोदी के चेहरे की वजह से ही भाजपा उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई थी। इसके विपरीत कांग्रेस की ओर से राजस्थान में अशोक गहलोत, मध्यप्रदेश में कमलनाथ और छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल का चेहरा मुख्यमंत्री के तौर पर था। यानी कांग्रेस प्रदेश नेताओं के चेहरों पर चुनाव लड़ रही थी, तो भाजपा के पास सिर्फ मोदी का चेहरा था। जब किसी भी प्रदेश में भाजपा का मुख्यमंत्री घोषित नहीं था तो फिर जीत का श्रेय भी पीएम मोदी को ही जाता है। ऐसे में तीनों राज्यों के प्रदेश नेताओं का यह दायित्व है कि वे मोदी द्वारा बताए नेता को ही मुख्यमंत्री स्वीकार करें। मोदी जिस नेता को मुख्यमंत्री बनाएंगे, वह सब को साथ लेकर मोदी की गारंटियों को पूरा करेगा। मोदी ने इन तीनों राज्यों के चुनावों में प्रयास किया है कि नेता की बजाए संगठन का महत्व हो।

वसुंधरा भी निर्देश मानेंगी:
तीन राज्यों में से राजस्थान में वसुंधरा राजे अकेली ऐसी नेता रही, जिन्होंने चुनाव नतीजों के बाद नवनिर्वाचित विधायकों को जयपुर स्थित आवास पर बुलाया। कुछ विधायक राजे से मिलने भी आए। तीन चार विधायकों ने मुलाकात के बाद वसुंधरा राजे को ही मुख्यमंत्री बनाने की बात कही। इससे ऐसा लगा कि वसुंधरा राजे भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने शक्ति प्रदर्शन कर रही है। लेकिन अब राजे ने भी संकेत दिए है कि वे पार्टी का निर्देश मानेंगी। राजे सात दिसंबर को दिल्ली में भाजपा के नेताओं से मुलाकात कर अपनी स्थिति को स्पष्ट कर रही हैं। सूत्रों की माने तो राजे ने भाजपा नेतृत्व को भरोसा दिलाया है कि वे संगठन के साथ खड़ी है। यहां यह उल्लेखनीय है कि चुनाव में भले ही वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री के तौर पर न रखा गया हो, लेकिन पीएम मोदी की जितनी भी सभाएं हुई उनमें वसुंधरा राजे मौजूद रहीं। यानी पीएम ने राजे को सम्मान देने में कोई कमी नहीं की।

मोदी का सम्मान:
तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत पर 7 दिसंबर को संसद भवन में भाजपा संसदीय दल की बैठक हुई। इस बैठक में जीत का श्रेय पीएम मोदी को देते हुए उनका सम्मान किया गया। बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि पीएम मोदी की वजह से ही तीन राज्यों में भाजपा को जीत हासिल हुई है। लोगों को अब यह भरोसा हो गया है कि मोदी के नेतृत्व में ही देश आगे बढ़ सकता है। मोदी जो कहते हैं उस पर अमल भी करते हैं। अपने सम्मान के प्रति आभार जताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मैं भी भाजपा का एक साधारण कार्यकर्ता हंू और सभी कार्यकर्ताओं की सक्रियता की वजह से ही भाजपा को जीत मिली है। उन्होंने कहा कि भाजपा के दिवंगत नेता स्वर्ग से देख रहे होंगे कि आज कार्यकर्ताओं की मेहनत से यह पार्टी कितनी सफल हो रही है। पीएम ने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि आजादी के बाद राज्यों में भाजपा को 39 बार दोबारा से सरकार में रहते हुए जनता के बीच जाना पड़ा। जनता ने भाजपा को 22 बार दोबारा सत्ता सौंपी हैं। कई राज्यों में तो तीसरी और चौथी बार जीत हासिल हुई है, जबकि कांग्रेस को कभी भी इतनी सफलता नहीं मिली।
Report By S.P.MITTAL