कोटा। रेलवे बोर्ड ने अपनी ठेका प्रणाली (Tendering System) में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बड़े बदलाव किए हैं। 13 मार्च को जारी की गई नई 'करेक्शन स्लिप' के अनुसार, अब कम दर पर ठेका लेने वाली फर्मों को अतिरिक्त सुरक्षा राशि जमा करनी होगी। इन नए नियमों को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
अक्सर देखा जाता है कि ठेकेदार काम पाने की होड़ में निर्धारित दर से काफी कम बोली लगा देते हैं, जिससे बाद में काम की गुणवत्ता खराब होती है या काम बीच में ही रुक जाता है।
नया नियम: यदि कोई ठेकेदार निर्धारित दर से 5% से अधिक कम पर बोली लगाता है, तो उसे 5% अतिरिक्त परफॉर्मेंस गारंटी (PG) जमा करानी होगी।
उद्देश्य: इससे ठेकेदार घाटे या बेहद कम मुनाफे वाले टेंडर लेने से बचेंगे, जिससे निर्माण कार्य समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा हो सकेगा।
रेलवे ने अर्नेस्ट मनी के नियमों को भी सरल और एकसमान बना दिया है। पहले 1 करोड़ तक के टेंडर पर 2% और उससे अधिक पर 0.5% राशि ली जाती थी, लेकिन अब सभी टेंडरों के लिए इसे फ्लैट 2% कर दिया गया है।
मुख्य ठेकेदार अब अपने काम का बड़ा हिस्सा दूसरे छोटे ठेकेदारों को नहीं सौंप सकेंगे।
पहले मुख्य ठेकेदार 50% काम सबलेट कर सकते थे, जिसे अब घटाकर 40% कर दिया गया है।
इससे मुख्य ठेकेदार की जिम्मेदारी और काम में उनकी प्रत्यक्ष भागीदारी बढ़ेगी।
रेलवे ने ठेकेदारों की आर्थिक क्षमता की जांच (Bid Capacity) के नियमों को भी सख्त किया है। पहले यह जांच 20 करोड़ या उससे अधिक के टेंडरों पर होती थी, लेकिन अब 10 करोड़ रुपये के टेंडरों पर भी ठेकेदार की बिड कैपेसिटी देखी जाएगी।
रेलवे के इन नए आदेशों को कोटा रेलवे स्टेशन पर चल रहे अमृत भारत योजना के कार्यों से जोड़कर देखा जा रहा है।
केस स्टडी: कोटा स्टेशन पर करीब $207.63$ करोड़ के काम चल रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि एल-1 (L1) और एल-2 (L2) पार्टी के बीच करीब 55 लाख रुपये का बड़ा अंतर था। सेकंड लोएस्ट पार्टी की दर करीब $262.63$ करोड़ थी। स्थानीय जानकारों का मानना है कि वर्तमान ठेकेदार द्वारा काफी कम रेट पर काम लेने के कारण ही प्रोजेक्ट की गति धीमी है।
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