रेलवे की बड़ी लापरवाही: चलती ट्रेन के शौचालय में फंसे रहे पूर्व CM के मीडिया सलाहकार, दरवाजा तोड़कर निकाला बाहर

रेलवे की बड़ी लापरवाही: चलती ट्रेन के शौचालय में फंसे रहे पूर्व CM के मीडिया सलाहकार, दरवाजा तोड़कर निकाला बाहर

कोटा | कोटा से श्रीगंगानगर जाने वाली ट्रेन (22981) के वातानुकूलित (AC) कोच में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मीडिया सलाहकार महेंद्र भारद्वाज शुक्रवार रात करीब एक घंटे तक ट्रेन के शौचालय में फंसे रहे। अंततः रेलवे स्टाफ को दरवाजा तोड़कर उन्हें बाहर निकालना पड़ा।

क्या है पूरा घटनाक्रम?

महेंद्र भारद्वाज जयपुर जाने के लिए कोच B-1 में सफर कर रहे थे। रात करीब 8:30 बजे जब ट्रेन सवाई माधोपुर स्टेशन से रवाना हुई, तब वह शौचालय गए। अचानक दरवाजे का लॉक खराब हो गया और वह अंदर ही कैद हो गए।

  • शोर में दब गई आवाज: महेंद्र ने मदद के लिए काफी शोर मचाया, लेकिन चलती ट्रेन की आवाज़ के कारण किसी ने उन्हें नहीं सुना।

  • परिजनों की मदद: हार मानकर उन्होंने फोन के जरिए अपने परिजनों को सूचना दी, जिन्होंने तुरंत कोटा मंडल के रेल अधिकारियों से संपर्क किया।

  • रेस्क्यू ऑपरेशन: सूचना मिलते ही ट्रेन स्टाफ मौके पर पहुंचा। पहले पेचकस और औजारों से लॉक खोलने की कोशिश की गई, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। अंत में स्टाफ ने दरवाजे पर लात मारकर लॉक तोड़ा और महेंद्र को बाहर निकाला।

"दम घुटने लगा था, बदबू से बुरा हाल था"

शौचालय से बाहर निकलने के बाद महेंद्र भारद्वाज ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि अंदर उनका दम घुटने लगा था। बदबू और घुटन के कारण उनकी हालत बिगड़ने लगी थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी इस घटना की जानकारी साझा कर रेलवे की अव्यवस्था पर नाराजगी जताई।

समय को लेकर विरोधाभास: 10 मिनट या एक घंटा?

इस घटना के समय को लेकर रेलवे प्रशासन और प्रत्यक्षदर्शियों के दावों में अंतर है:

  • रेलवे (Sr. DCM सौरव जैन): उनका कहना है कि सूचना मिलते ही 10 मिनट के भीतर ईसरदा स्टेशन पर उन्हें बाहर निकाल लिया गया था।

  • स्टेशन स्टाफ: स्टाफ का कहना है कि वह करीब आधे घंटे फंसे रहे और उन्हें चौथ का बरवाड़ा स्टेशन पर निकाला गया।

  • महेंद्र भारद्वाज व अन्य: उनके अनुसार यह मशक्कत करीब एक घंटे तक चली।

कोटा में रखरखाव पर उठे सवाल

हैरानी की बात यह है कि इस ट्रेन का प्राइमरी मेंटेनेंस (रखरखाव) कोटा में ही होता है। यात्रियों का कहना है कि जब महंगे किराए वाले वातानुकूलित कोचों का यह हाल है, तो जनरल और स्लीपर कोचों की स्थिति क्या होगी?

अधिकारी का पक्ष: वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरव जैन ने बताया कि लॉक खराब होने के कारण यह घटना हुई। कोटा पहुंचने पर ट्रेन के लॉक की जांच की जाएगी कि आखिर यह खराबी कैसे आई।


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