कोटा | रामगंजमंडी-भोपाल नई रेल लाइन परियोजना के तहत जूनाखेड़ा, अकलेरा और झालरापाटन स्टेशनों पर बने नए रेलवे आवास विवादों के घेरे में हैं। निर्माण के मात्र एक साल के भीतर ही इन मकानों की हालत जर्जर हो चुकी है। घटिया निर्माण सामग्री और अव्यवस्थाओं से त्रस्त रेल कर्मचारियों ने अब भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो), जबलपुर महाप्रबंधक और कोटा डीआरएम से लिखित शिकायत की है।
| स्टेशन | मुख्य समस्याएँ |
| जूनाखेड़ा | सीवरेज चैंबर के ढक्कन गायब, नालियां जाम, किचन में सीलन, पानी की टंकियों में ढक्कन नहीं। |
| अकलेरा | शौचालय और स्नानघर का एक ही कॉमन चैंबर, ओवरफ्लो होकर घरों में घुसता गंदा पानी। |
| झालरापाटन | एक साल में ही छतें टपकने लगीं, घटिया सेनेटरी फिटिंग और लाइट फिटिंग का उखड़ना। |
कर्मचारियों ने अपनी शिकायत में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जूनाखेड़ा स्टेशन के ब्लॉक 9-10 में ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल है, जिससे गंदा पानी घरों में भर रहा है। बदबू और गंदगी के कारण बीमारियां फैलने का डर बना हुआ है।
सबसे गंभीर स्थिति पानी की टंकियों की है। छत पर रखी टंकियों में ढक्कन न होने के कारण कबूतर उनमें बीट कर रहे हैं और कई बार पक्षी डूबकर मर भी चुके हैं, जिससे कर्मचारी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
CBI और उच्चाधिकारियों को शिकायत भेजने के बाद रेल प्रशासन हरकत में आया है। शनिवार को विभागीय अधिकारियों की एक टीम ने इन कॉलोनियों का जायजा लिया। मौके पर कमियों को देख अधिकारियों ने जल्द मरम्मत और व्यवस्थाएं सुधारने का आश्वासन दिया है। हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद पहले कोई सुनवाई नहीं हुई, इसलिए अब निष्पक्ष जांच जरूरी है।
"नए आवासों में जिस तरह की सामग्री इस्तेमाल हुई है, वह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है। एक साल में छत टपकना और फिटिंग उखड़ना सामान्य नहीं है।" - नाम न छापने की शर्त पर एक पीड़ित कर्मचारी
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