जयपुर में ई-रिक्शा का 'डिजिटल ट्रैप': 1 जुलाई से जोन बदला तो खैर नहीं, QR कोड तय करेगा रूट

जयपुर में ई-रिक्शा का 'डिजिटल ट्रैप': 1 जुलाई से जोन बदला तो खैर नहीं, QR कोड तय करेगा रूट

मुख्यमंत्री के निर्देश पर ट्रैफिक रिफॉर्म का मेगा प्लान; बिना लाइसेंस और फिटनेस वाले करीब 25 हजार ई-रिक्शा होंगे बाहर

जयपुर। गुलाबी नगरी में ट्रैफिक जाम की बड़ी वजह बन रहे ई-रिक्शा अब एक निश्चित दायरे और नियम में बंधने जा रहे हैं। पुलिस, यातायात और परिवहन विभाग ने मिलकर ई-रिक्शा के लिए डिजिटल मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया है। इसके तहत अब शहर को 7 जोन में बांटा जाएगा और हर रिक्शा पर एक विशेष QR कोड चस्पा होगा।

🗓️ मिशन ई-रिक्शा: अहम तारीखें

व्यवस्था को तीन चरणों में लागू किया जाएगा:

  1. 3 मई से 15 जून: क्यूआर कोड के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे।

  2. 16 जून से 30 जून: पात्र चालकों को क्यूआर कोड जारी किए जाएंगे।

  3. 1 जुलाई से: शहर में जोनवार (Zone-wise) संचालन अनिवार्य हो जाएगा।

📋 कड़े नियम: हजारों ई-रिक्शा पर लटकी तलवार

क्यूआर कोड हासिल करने के लिए चालकों को निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे:

  • स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस (DL)

  • पंजीकरण प्रमाणपत्र (RC)

  • फिटनेस प्रमाणपत्र और बीमा

  • आधार कार्ड

चुनौती: जयपुर में संचालित हजारों ई-रिक्शा चालकों के पास स्थायी लाइसेंस नहीं है। वर्तमान में केवल 700 चालकों के पास स्थायी और 3,000 के पास लर्निंग लाइसेंस है। ऐसे में बिना वैध दस्तावेज, फिटनेस और इंश्योरेंस वाले करीब 20 से 25 हजार ई-रिक्शा का सिस्टम से बाहर होना तय माना जा रहा है।

🛑 जोनवार संचालन और डिजिटल ट्रैकिंग

  • सात जोन: परकोटे की तर्ज पर पूरे शहर को 7 जोन में बांटा जाएगा। चालक अपनी पसंद का जोन चुन सकेंगे, लेकिन एक बार जोन तय होने के बाद वे उससे बाहर सवारी नहीं ढो पाएंगे।

  • QR कोड स्कैनिंग: यदि कोई ई-रिक्शा अपने आवंटित जोन से बाहर पाया जाता है, तो ट्रैफिक पुलिस क्यूआर कोड स्कैन कर तुरंत चालान करेगी।

  • संचालन समिति: हर जोन में आरटीओ, यातायात पुलिस और ई-रिक्शा प्रतिनिधियों की एक समिति बनेगी जो अनुशासन सुनिश्चित करेगी।

शहर को क्या होगा फायदा?

  1. ट्रैफिक जाम से मुक्ति: ई-रिक्शा मुख्य सड़कों के बजाय अंदरूनी गलियों और फीडर रूट पर चलेंगे।

  2. बाहरी चालकों पर लगाम: जयपुर का आधार कार्ड न होने पर बाहरी राज्यों के अवैध चालक सिस्टम से बाहर हो जाएंगे।

  3. सुरक्षा: डिजिटल पहचान होने से किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में चालक और रिक्शा को आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।

आरटीओ राजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार पूरी रूपरेखा तैयार है। इस डिजिटल सिस्टम से शहर की यातायात व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और आम जनता को जाम से राहत मिलेगी।


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