जयपुर। राजस्थान में समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की आवक उम्मीद से कहीं ज्यादा हो रही है। 16 मार्च से शुरू हुई खरीद के मात्र 19 दिनों में ही 29 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं गोदामों में पहुंच चुका है। एफसीआई द्वारा इस साल कुल 21 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा गया है, जिसके चलते आगामी दिनों में भंडारण (Storage) का संकट खड़ा होना तय है।
भंडारण की समस्या से निपटने के लिए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने एक विशेष रणनीति अपनाई है:
एक साथ वितरण: अब राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA) के लाभार्थियों को मई और जून महीने का राशन भी अप्रैल में ही दे दिया जाएगा।
कुल मात्रा: उपभोक्ताओं को इस महीने अपने कोटे का तीन गुना (3 माह का) गेहूं एक साथ मिल सकेगा।
समय सीमा: विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 30 अप्रैल तक शत-प्रतिशत उठाव सुनिश्चित किया जाए।
मासिक उठाव: राजस्थान में प्रतिमाह करीब 2.25 लाख मीट्रिक टन गेहूं वितरित होता है।
तीन माह का लक्ष्य: अप्रैल से जून तक के लिए कुल 6.75 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उठाव सरकारी डिपो से किया जाना है।
लाभार्थी: प्रदेश के 4 करोड़ से अधिक लोगों को इस निर्णय का सीधा लाभ मिलेगा।
सरकार के इस फैसले से जहां आम जनता खुश है, वहीं प्रदेश के करीब 27 हजार राशन डीलर पशोपेश में हैं। डीलर्स का कहना है कि:
"हमारे पास आमतौर पर केवल एक महीने का स्टॉक रखने की जगह होती है। अब एक साथ तीन महीने का गेहूं (6.75 लाख मीट्रिक टन) दुकानों तक पहुंचेगा, तो उसे सुरक्षित रखना और चूहों व नमी से बचाना एक बड़ी चुनौती होगी।"
वितरण में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी रोकने के लिए सरकार ने स्पष्ट किया है:
वेइंग स्केल: ग्राहक की पर्ची तभी जारी होगी जब पॉस (POS) मशीन से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक कांटे पर वास्तविक वजन तौल लिया जाएगा।
पोर्टल एंट्री: उठाव और वितरण की हर जानकारी विभागीय पोर्टल पर रियल-टाइम दर्ज करनी होगी।
जवाबदेही: यदि निर्धारित समय में गेहूं का उठाव नहीं हुआ, तो संबंधित रसद अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी।
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