कोटा | 17 अप्रैल, 2026 कोटा रेल मंडल की चर्चित लोको (एवं आई) निरीक्षक पदोन्नति भर्ती परीक्षा में हुई गड़बड़ी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने लोकपाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया है कि इस मामले में प्रतिवादी एलआई को सुनवाई का पूरा मौका दिया जाए।
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 की धारा 20(7) के तहत लोकपाल प्रतिवादी एलआई के बयान दर्ज करे। इस प्रक्रिया के बाद ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस आदेश के बाद अब इस लंबे समय से लंबित मामले में जल्द ही अंतिम फैसला आने की उम्मीद बढ़ गई है।
यह मामला मई 2023 में आयोजित चीफ लोको इंस्पेक्टर (CLI) पद के लिए विभागीय पदोन्नति परीक्षा से शुरू हुआ था:
परीक्षा: 5 पदों के लिए हुई इस परीक्षा में 96 लोको पायलट शामिल हुए थे।
विजिलेंस जांच: सितंबर 2023 में रिजल्ट आने के बाद ओएमआर (OMR) शीट में हेरा-फेरी के आरोप लगे। रेलवे विजिलेंस ने अपनी जांच में गड़बड़ी तो पाई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
लोकपाल की एंट्री: मामला लोकपाल तक पहुँचा, जहाँ प्राथमिक जांच में धांधली की पुष्टि होने पर इसे सीबीआई (CBI) जयपुर को सौंप दिया गया।
सीबीआई ने पिछले वर्ष 9 सितंबर को अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता (Sr. DEE) और संबंधित एलआई को दोषी ठहराया था।
हालांकि, इस बीच आरोपी एलआई ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनका तर्क था कि इस पूरी प्रक्रिया में उनका पक्ष नहीं सुना गया। दिल्ली हाईकोर्ट ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का हवाला देते हुए लोकपाल के पुराने आदेशों को रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट के इसी फैसले को लोकपाल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर अब यह ताजा आदेश आया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब लोकपाल को नियमानुसार एलआई का पक्ष सुनना होगा। सीबीआई पहले ही मामले में दोष सिद्ध कर चुकी है, ऐसे में अब लोकपाल द्वारा दर्ज किए जाने वाले बयान इस हाई-प्रोफाइल मामले की दिशा तय करेंगे।
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