पीलोदा स्टेशन पर बड़ा हादसा टला: हवा में उड़ीं फुट ओवर ब्रिज की चद्दरें, ओएचई में फंसने से 2 घंटे थमी रही कासगंज पैसेंजर

कोटा/गंगापुर सिटी। पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल में निर्माण कार्यों की लापरवाही यात्रियों की जान पर भारी पड़ती दिख रही है। शुक्रवार शाम तेज हवा के चलते पीलोदा स्टेशन पर नवनिर्मित फुट ओवर ब्रिज (FOB) की करीब आधा दर्जन लोहे की चद्दरें उखड़कर रेल पटरियों और हाई वोल्टेज ओएचई (OHE) लाइनों पर जा गिरीं। इस घटना के कारण रेल यातायात घंटों प्रभावित रहा।

ओएचई में अटकी चद्दर, मची अफरा-तफरी

घटना शुक्रवार देर शाम करीब 7:10 बजे की है। तेज हवा के झोंके से एफओबी की चद्दरें उखड़ गईं:

  • ट्रेनें थमीं: एक चद्दर सीधे ओएचई लाइन में जाकर फंस गई, जिसके चलते गंगापुर-कासगंज पैसेंजर (55356) को करीब 2 घंटे तक मौके पर ही खड़ा रखना पड़ा।

  • धीमी हुई रफ्तार: सुरक्षा के मद्देनजर निजामुद्दीन-बांद्रा गरीब रथ (12910) को भी अत्यंत धीमी गति से निकाला गया।

  • रेस्क्यू ऑपरेशन: सूचना मिलते ही टीआरडी विभाग के कर्मचारी खंभे पर चढ़े और ओएचई में फंसी चद्दर को हटाया। इस दौरान हिंडौन से टावर वैगन भी मौके पर बुला ली गई थी।

4 दिन में दूसरी समान घटना: नए निर्माणों पर सवाल

हैरानी की बात यह है कि ठीक ऐसी ही घटना 4 दिन पहले श्री महावीर जी स्टेशन पर भी हुई थी।

  1. मंगलवार (महावीर जी): यहाँ भी एफओबी की चद्दरें उड़कर प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर गिरी थीं, जहाँ यात्री बाल-बाल बचे थे।

  2. शुक्रवार (पीलोदा): यहाँ चद्दरें सीधे ट्रैक और ओएचई पर जा गिरीं।

खास बात: ये दोनों फुट ओवर ब्रिज हाल ही में नए बनाए गए हैं। नए निर्माणों का इस तरह हवा में उखड़ जाना निर्माण सामग्री और फिटिंग की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

स्टेशन मास्टर की सतर्कता से टला बड़ा कांड

सूत्रों के अनुसार, स्टेशन मास्टर ने चद्दरों को हिलते देख खतरा भांप लिया था और समय रहते ट्रेनों को धीमी गति से चलाने के आदेश (Caution Order) दे दिए थे। यदि कोई ट्रेन तेज रफ्तार से निकलती और चद्दर उससे टकराती, तो ओएचई ब्रेकडाउन के साथ-साथ एक बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।

यात्री सुरक्षा बनाम प्रशासनिक दावे

एक ओर रेल प्रशासन अपनी आय और विकास के रिकॉर्ड गिना रहा है, वहीं दूसरी ओर अमृत भारत योजना और अन्य निर्माण कार्यों में घटिया स्तर के काम की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। बार-बार होती ये घटनाएं संकेत दे रही हैं कि यदि समय रहते इन "नवनिर्मित" ढांचों की जांच नहीं की गई, तो भविष्य में किसी बड़े जान-माल के नुकसान से इनकार नहीं किया जा सकता।


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