कोटा। पश्चिम-मध्य रेलवे के प्रमुख मुख्य संरक्षा अधिकारी (PCSO) मनोज गोविंद राव गुरुमुखी अपने सख्त तेवरों के लिए चर्चा में हैं। कोटा मंडल के सेफ्टी ऑडिट पर पहुँचे गुरुमुखी ने सोगरिया स्टेशन मास्टर के कक्ष में रखे एक छोटे मंदिर को तत्काल प्रभाव से हटवा दिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अब तक विभिन्न कार्यालयों और स्टेशनों से दर्जनों ऐसे मंदिर हटवा चुके हैं।
हालांकि मंदिर हटाने का कोई लिखित कारण आधिकारिक तौर पर साझा नहीं किया गया है, लेकिन इसे अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) से जोड़कर देखा जा रहा है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि कार्यालयों में बने छोटे मंदिरों में कर्मचारी दीया या अगरबत्ती जलाते हैं। यदि इन्हें पूरी तरह बुझने से पहले छोड़ दिया जाए, तो यह भीषण आग का कारण बन सकते हैं।
गौरतलब है कि कुछ समय पहले कोटा रेलवे वर्कशॉप के कार्यालय में लगी भीषण आग का कारण भी मंदिर में जलती अगरबत्ती/दीया को ही माना गया था, जिसके बाद कारखाने के अंदर से भी कई छोटे मंदिरों को हटाया गया था।
PCSO गुरुमुखी जबलपुर-अजमेर दयोदय एक्सप्रेस के सैलून से सोगरिया स्टेशन पहुँचे थे। कोटा मुख्य स्टेशन की ओर रवाना होने से पहले उन्होंने सोगरिया स्टेशन मास्टर रूम का औचक निरीक्षण किया। जैसे ही उनकी नजर वहाँ रखे भगवान की तस्वीरों और छोटे मंदिर पर पड़ी, उन्होंने गहरी नाराजगी जताई और स्टेशन मास्टर को इसे तुरंत हटाने के निर्देश दिए।
आमतौर पर कई सरकारी कार्यालयों में कर्मचारी अपनी ड्यूटी शुरू करने से पहले भगवान को नमन करते हैं, जिसके चलते छोटे मंदिर या तस्वीरें रखी जाती हैं। लेकिन संरक्षा (Safety) को सर्वोपरि रखते हुए पीसीएसओ ने इस परंपरा पर कड़ा रुख अपनाया है।
बता दें कि मनोज गोविंद राव गुरुमुखी ने इसी वर्ष मार्च में कार्यभार संभाला है। वे पूर्व में कोटा कंस्ट्रक्शन विभाग में भी अपनी सेवाएँ दे चुके हैं, जिसके चलते वे यहाँ की कार्यप्रणाली से भली-भांति परिचित हैं।
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