सवाई माधोपुर ट्रेन हादसा: पॉइंट्समैन मोहन सिंह को नौकरी से बर्खास्त, जांच रिपोर्ट और सिस्टम पर उठे सवाल

सवाई माधोपुर ट्रेन हादसा: पॉइंट्समैन मोहन सिंह को नौकरी से बर्खास्त, जांच रिपोर्ट और सिस्टम पर उठे सवाल

कोटा | सवाई माधोपुर में करीब चार महीने पहले हुए मेमू ट्रेन हादसे में कोटा मंडल प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। हादसे के लिए जिम्मेदार मानते हुए पॉइंट्समैन मोहन सिंह को सेवा से बर्खास्त (Remove from Service) कर दिया गया है। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद रेलवे की आंतरिक कार्यप्रणाली और लेटलतीफी को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

क्या था पूरा मामला?

पिछले वर्ष 30 सितंबर की देर रात कोटा से गई मेमू ट्रेन सवारी उतारने के बाद यार्ड की ओर जा रही थी। इसी दौरान पॉइंट पर ट्रेन पटरी से उतर गई। हादसे के बाद कोटा और गंगापुर सिटी से दुर्घटना राहत ट्रेन (ART) मौके पर पहुंची और करीब 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद ट्रेन को वापस पटरी पर लाया जा सका।

जांच रिपोर्ट में विरोधाभास: सुपरवाइजर बनाम कमेटी

हादसे के बाद दो अलग-अलग जांच रिपोर्ट सामने आईं, जिनमें विसंगतियां देखने को मिलीं:

  • कमिटी की रिपोर्ट: वरिष्ठ अधिकारियों की कमेटी ने हादसे के लिए पूरी तरह परिचालन विभाग (Operating Department) की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।

  • सुपरवाइजरों की रिपोर्ट: प्रारंभिक जांच में सुपरवाइजरों ने पॉइंट की खराबी की ओर इशारा किया था। रिपोर्ट के अनुसार, पॉइंट या तो ठीक से सेट नहीं था या उसमें 'गैप' रह गया था। हालांकि, यातायात निरीक्षक ने इस पर असहमति जताई थी।

वर्षों से एक ही जगह जमे कर्मचारी: 'संवेदनशील' पदों पर रसूख का खेल

सवाई माधोपुर स्टेशन पर कर्मचारियों के लंबे समय तक टिके रहने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं:

  • कई पॉइंट्समैन और ऑपरेटिंग स्टाफ के कर्मचारी सालों से एक ही जगह जमे हुए हैं।

  • पूर्व में सजा के तौर पर हुए तबादलों के बाद भी कई कर्मचारी फिर से सवाई माधोपुर में अपनी सेटिंग बिठाने में कामयाब रहे।

  • पिछली घटनाएं: इस हादसे से एक महीने पहले जयपुर लाइन पर गलत 'कॉशन ऑर्डर' देने के कारण एक महिला स्टेशन मास्टर को भी निलंबित किया जा चुका है।

3 साल से अटकी इंटरलॉकिंग: तकनीक के अभाव में 'मानवीय भूल' का खतरा

सवाई माधोपुर स्टेशन पर सबसे बड़ी लापरवाही बुनियादी ढांचे को लेकर सामने आई है।

करीब 3.5 साल पहले स्वीकृत होने के बावजूद इंटरलॉकिंग का काम अब तक शुरू नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इंटरलॉकिंग का काम पूरा हो जाता, तो मानवीय भूल की गुंजाइश खत्म हो जाती और ऐसे हादसों को टाला जा सकता था।


वर्तमान स्थिति: बर्खास्तगी से पहले मोहन सिंह का तबादला छबड़ा किया गया था। अब वे इस फैसले के खिलाफ प्रशासन से अपील कर रहे हैं। रेलवे प्रशासन की इस कार्रवाई को छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराने के रूप में देखा जा रहा है, जबकि तकनीकी कमियों (जैसे इंटरलॉकिंग) को दूर करने में प्रशासन अब भी सुस्त है।

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