विजिलेंस टीम ने नापी जमीन, रेलवे को लाखों का चूना लगाने का खेल उजागर!

विजिलेंस टीम ने नापी जमीन, रेलवे को लाखों का चूना लगाने का खेल उजागर!

कोटा/हिंडौन। कोटा रेल मंडल के गंगापुर-बयाना रेल खंड स्थित हिंडौन स्टेशन पर नियमों को ताक पर रखकर निर्धारित लोकेशन से अलग जगह खानपान स्टॉल लगाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। इस गड़बड़ी की गोपनीय शिकायत मिलने पर पश्चिम-मध्य रेलवे की विजिलेंस (सतर्कता) शाखा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

चार सदस्यीय विजिलेंस टीम ने की नापतोल

मामले की जमीनी हकीकत जानने के लिए विजिलेंस की एक चार सदस्यीय टीम रविवार को औचक निरीक्षण के लिए हिंडौन स्टेशन पहुंची। टीम ने मौके पर जाकर खानपान स्टॉल, उससे जुड़े लाइसेंस और आवंटन के दस्तावेजों की सघन जांच की। सतर्कता अधिकारियों ने स्टॉल की वास्तविक लोकेशन और आवंटित नक्शे का मिलान करने के लिए मौके पर फीता डालकर नापतोल भी की। इस दौरान टीम ने स्टॉल संचालक और वहां तैनात जिम्मेदार वाणिज्य (Commercial) कर्मचारियों से भी पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए।

संचालक का दावा: बिजली-टेलीफोन लाइन की वजह से बदली जगह

इस पूरे विवाद पर स्टॉल संचालक कृष्णा प्रजापति ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि स्टॉल निर्धारित जगह से मात्र दो-ढाई फीट की दूरी पर ही लगी है। संचालक का दावा है कि यह बदलाव उसने खुद नहीं किया, बल्कि रेलवे अधिकारियों के निर्देश पर ही किया गया था। स्टॉल आवंटित होने के समय तय स्थान पर बिजली और टेलीफोन की लाइनें जा रही थीं, जिसके कारण रेलवे प्रशासन ने ही खुद स्टॉल को दो-ढाई फीट आगे लगाने की जगह दी थी।

कमाई बढ़ाने और लाइसेंस फीस बचाने का बड़ा खेल!

रेलवे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, स्टालों की लोकेशन बदलने के पीछे एक बड़ा वित्तीय खेल चलता है, जो कोटा मंडल के कई स्टेशनों पर पैर पसार चुका है। इससे पहले कोटा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर चार पर भी ऐसा ही मामला उजागर हो चुका है।

सूत्रों ने इस खेल की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) का खुलासा करते हुए बताया:

  • शुरुआती सर्वे: सबसे पहले स्टॉल का सर्वे प्लेटफॉर्म के ऐसे कोने या शांत हिस्से में किया जाता है, जहां यात्रियों की आवाजाही कम हो। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि उस जगह के हिसाब से रेलवे की लाइसेंस फीस काफी कम तय हो।

  • लोकेशन में हेरफेर: एक बार कम फीस पर ठेका (आवंटन) मिलने के बाद, मिलीभगत से स्टॉल को मुख्य प्लेटफॉर्म या सीढ़ियों के पास (जहाँ यात्रियों की भारी भीड़ रहती है) सरका दिया जाता है ताकि अंधाधुंध कमाई हो सके।

"इस हेरफेर के कारण रेलवे को हर साल लाखों रुपये के राजस्व (Revenue) का चूना लगता है। कम फीस देकर अधिक कमाई वाले प्राइम लोकेशन पर कब्जा कर लिया जाता है। हैरानी की बात यह है कि इस खेल के बार-बार सामने आने के बावजूद प्रशासन द्वारा आज तक किसी भी बड़े जिम्मेदार रेल अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।" — रेलवे सूत्र

विजिलेंस की इस कार्रवाई के बाद अब देखना होगा कि जांच टीम की रिपोर्ट पर रेलवे प्रशासन हिंडौन स्टेशन के दोषियों और इस रैकेट के पीछे बैठे बड़े चेहरों पर क्या एक्शन लेता है।

#IndianRailways #WestCentralRailway #WCRVigilance #HindaunStation #KotaDivision #RailwayCorruption #CateringStallScam #RailwayNews

G News Portal G News Portal
223 0

0 Comments

No comments yet. Be the first to comment!

Leave a comment

Please Login to comment.

© G News Portal. All Rights Reserved.