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मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा के बयान से राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और बसपा प्रमुख मायावती को अपनी राजनीतिक हैसियत का अंदाजा लगा लेना चाहिए।

मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा के बयान से राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और बसपा प्रमुख मायावती को अपनी राजनीतिक हैसियत का अंदाजा लगा लेना चाहिए।

मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा के बयान से राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और बसपा प्रमुख मायावती को अपनी राजनीतिक हैसियत का अंदाजा लगा लेना चाहिए।
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राजस्थान मंत्रिमंडल का फेरबदल 21 नवंबर को हुआ। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजेंद्र सिंह गुढा को राज्यमंत्री की शपथ दिलवा कर सैनिक कल्याण सिविल डिफेंस और होमगार्ड का स्वतंत्र प्रभार का मंत्री बनाया। मंत्री बनने के बाद गुढा अपने गृह जिले झुंझुनूं के दौरे पर हैं। 25 नवंबर को एक स्वागत समारोह में गुढा ने कहा कि मैं बसपा से चुनाव जीतता हंू और फिर कांग्रेस में शामिल होकर मंत्री बन जाता हंू। कांग्रेस में जब दरी उठाने का समय आता है तो मैं कांग्रेस को छोड़ देता हंू। मैं दूसरी बार बहन जी (बसपा प्रमुख मायावती) से टिकट ले आया। क्या मेरे इस खेल में कोई कमी है? स्वागत समारोह में उपस्थित लोगों ने गुढा के इस कथन पर खूब ठहाके लगाए। लेकिन गुढा के इस कथन से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और बसपा प्रमुख मायावती को अपनी राजनीतिक हैसियत का अंदाजा लगा लेना चाहिए। इस कथन से पता चलता है कि गुढा जैसे राजनीतिज्ञ के सामने गहलोत और मायावती की क्या हैसियत है? सब जानते हैं कि 2008 में भी गुढ़ा बसपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ कर विधायक बने। तब भी गुढा ने मायावती को राजनीतिक धोखा दिया और कांग्रेस में शामिल हो गए। बसपा को धोखा देने के बाद 2018 में मायावती से दोबारा से टिकट हासिल कर लिया। अब मायावती बताएं कि बसपा को धोखा देने वाले को दोबारा से टिकट क्यों दिया? शायद मायावती तो इस सवाल का जवाब नहीं दे सकें, लेकिन गुढा और उनके समर्थकों की ओर से पूर्व में कहा गया है कि बसपा में पैसे देकर टिकट मिलते हैं। जब पैसे देकर टिकट लिए जाएंगे, तब गुढा जैसे विधायक कांग्रेस में शामिल होकर कीमत तो वसूलेंगे ही। गुढा ने अपने कथन से कांग्रेस को भी आईना दिखा दिया है। गुढा ने 21 नवंबर को मंत्री पद की शपथ ली थी, लेकिन अभी तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। गुढा चाहते हैं कि उनके साथ जो पांच विधायक कांग्रेस में शामिल हुए हैं, उन्हें भी संसदीय सचिव या किसी निगम बोर्ड आदि का अध्यक्ष बना कर मंत्री का दर्जा दिया जाए। मालूम हो कि गुढा के साथ जोगिंदर सिंह अबाना, संदीप यादव, वाजिब अली, लाखन सिंह और दीपचंद खेडिय़ा ने भी बसपा छोड़ कर कांगे्रस की सदस्यता ग्रहण की थी। गुढा मंत्री का पद न संभाल कर सीएम गहलोत पर दबाव बना रहे हैं। गहलोत को इस बात का अहसास होगा चाहिए कि उन्होंने किस प्रवृत्ति के विधायकों को मंत्री बनाया है।

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