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ज्ञानदूत 2.0 का ऑनलाइन उद्घाटन कार्यक्रम विद्यार्थियों की पढ़ाई हर संभव जारी रखेंगे ः उच्च शिक्षा राज्य मंत्री

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ज्ञानदूत 2.0 का ऑनलाइन उद्घाटन कार्यक्रम विद्यार्थियों की पढ़ाई हर संभव जारी रखेंगे ः उच्च शिक्षा राज्य मंत्री जयपुर, 12 जनवरी। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्री राजेन्द्र सिंह यादव ने स्वामी विवेकानन्द जयंती के अवसर पर बुधवार को विद्यार्थियों की शैक्षणिक सहायता, मार्गदर्शन और परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष सहायता कार्यक्रम ज्ञानदूत के द्वितीय संस्करण का शुभारम्भ किया। कॉलेज शिक्षा विभाग की ओर से आरंभ ज्ञानदूत 2.0 के ऑनलाइन उद्घाटन कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम में नयापन करते हुए सभी राजकीय विश्वविद्यालयों के उन विषयों, जो राजकीय महाविद्यालयों में संचालित हैं, के पाठ्यक्रमों के अनुसार हिन्दी भाषा में ई-कंटेंट तैयार करवाये जा रहे हैं। इसके लिये कॉलेज शिक्षा विभाग द्वारा फिलहाल कला संकाय के 8, विज्ञान के 4 एवं वाणिज्य के 2 विषयों सहित कुल 14 विषयों में यह ई-कंटेंट तैयार करवाने की पहल की गई है। इसमें मांग के अनुसार और भी विषयों को सम्मिलित किया जा सकता है। इसके लिये 9 राजकीय महाविद्यालयों को विषयवार नोडल बनाया गया है।श्री यादव ने कहा कि इस विशेष अकादमिक सहायता कार्यक्रम की अपनी आवश्यकता है जिसमें विद्यार्थियों को अच्छी गुणवत्ता का ई-कंटेंट हिन्दी भाषा में ऑनलाइन उपलब्ध होगा, जिसे 24 x 7 मोड पर कहीं से भी और कभी भी देखा-पढ़ा जा सकेगा। साथ ही प्रत्येक सप्ताह विद्यार्थियों की विषयपरक समस्याओं का ऑनलाइन लाइव समाधान भी इस कार्यक्रम में करवाया जायेगा, जिससे विद्यार्थी अपनी शंका का समाधान कर सकेंगे। विशेषतः अभी कोविड की जो परिस्थितियां उत्पन्न हो रही हैं, उनमें इस ज्ञानदूत 2.0 कार्यक्रम की प्रासंगिकता और बढ़ गई है।उन्होंने कहा कि जब कोरोना की दूसरी लहर के समय इस ज्ञानदूत का प्रथम चरण आरम्भ किया था, तो वह विद्यार्थियों के लिए काफी लाभप्रद रहा। हम चाहते हैं कि इस तीसरी लहर से विद्यार्थियों की पढ़ाई किसी भी तरह बाधित नहीं हो। ज्ञानदूत 2.0 के तहत विद्यार्थियों को क्वालिटी ई-कंटेंट उपलब्ध हो सकेगा। श्री यादव ने बताया कि विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रमानुसार सभी विषयों में तैयार करवाये जा रहे ई-कंटेंट कॉलेज शिक्षा विभाग के ज्ञानदूत चैनल पर उपलब्ध होंगे जो कि सभी विद्यार्थियों, चाहे वे सरकारी अथवा प्राइवेट महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी हों, अथवा स्वयंपाठी विद्यार्थी हों, सभी के लिये पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने कहा कि हमने सभी प्राचार्यों को भी निर्देश जारी करवाये हैं कि वे इस कार्यक्रम से अधिकाधिक विद्यार्थियों को जुड़ने के लिये प्रेरित करें ताकि वे कोरोना के हालात के चलते अपने आप को सुरक्षित रखते हुए अपनी पढ़ाई जारी रख सके और अपनी पढ़ाई संबंधी अपनी समस्याओं का घर बैठे समाधान पा सकें। कार्यक्रम में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के शासन सचिव श्री नारायण लाल मीना ने कहा कि इस कोरोना समय में फिर से महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जारी रखना एक चुनौती है। अतः ज्ञानदूत जैसे कार्यक्रम समय की जरुरत है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के कॉलेज एवं विश्वविद्यालय शिक्षा संवर्ग में हिन्दी भाषा माध्यम के विद्यार्थियों को अच्छी गुणवत्ता के ई-कंटेंट मिलने में समस्या आती है। अतः इस कार्यक्रम के माध्यम से हम अच्छी गुणवत्ता का सब्जेक्ट कन्टेन्ट हिन्दी भाषा में उपलब्ध करवाने जा रहे हैं ताकि विद्यार्थियों को समझने व पढ़ने में सुविधा हो सके। आयुक्त कॉलेज शिक्षा श्रीमती शुचि त्यागी ने योजना के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इन विषयवार ई-कंटेंट्स के द्वारा हम विद्यार्थियों के लिये एक ऑनलाइन रिपोजिटरी तैयार करवा रहे हैं, जहां कोई भी विद्यार्थी अपने विषय एवं सिलेबस के हिसाब से पाठ्य सामग्री को आसानी से ढूंढ सकता है। साथ ही विद्यार्थियों को ऑनलाइन प्रॉब्लम सॉल्विंग की सुविधा देकर हम उनके बेहतर भविष्य के लिये श्रेष्ठ तैयारी का विकल्प प्रदान करवा रहे हैं। कार्यक्रम से अतिरिक्त आयुक्त श्री त्रिभुवनपति, सभी राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक एवं विद्यार्थी जुड़े हुए थे। कार्यक्रम का संचालन ज्ञानदूत कार्यक्रम के राज्य समन्वयक एवं नवाचार प्रभारी डॉ. विनोद भारद्वाज ने किया तथा अतिथियों का स्वागत इस कार्यक्रम की राज्य सह-समन्वयक डॉ. ललिता यादव ने किया।चयनित विषय  कुल (14)कला संकाय ः भूगोल, अर्थशास्त्र, इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, लोक प्रशासन, हिन्दी एवं अंग्रेजी।विज्ञान संकाय ः रसायन शास्त्र, भौतिक  शास्त्र, वनस्पति शास्त्र तथा प्राणि शास्त्र।वाणिज्य संकाय ः लेखा एवं व्यावसायिक सांख्यिकी, आर्थिक प्रशासन एवं वित्तीय प्रबंधन।चयनित महाविद्यालय (9)राजकीय महाविद्यालय अजमेर, राजकीय डूंगर महाविद्यालय बीकानेर, राजकीय महाविद्यालय चूरु, राजकीय महाविद्यालय बांसवाडा, राजकीय महाविद्यालय जोधपुर, राजकीय महाविद्यालय पाली, राजकीय कला महाविद्यालय सीकर, राजकीय कला कन्या महाविद्यालय कोटा तथा राजकीय कन्या महाविद्यालय नाथद्वारा।—–

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