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जल जीवन मिशनः पीएचईडी एवं डब्ल्यूआरडी की संयुक्त बैठक वृहद पेयजल परियोजनाओं में ‘वाटर रिजर्वेशन‘ के लिए जारी रहेंगे साझा प्रयास

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जल जीवन मिशनः पीएचईडी एवं डब्ल्यूआरडी की संयुक्त बैठकवृहद पेयजल परियोजनाओं में ‘वाटर रिजर्वेशन‘ के लिए जारी रहेंगे साझा प्रयासजयपुर, 13 जनवरी। प्रदेश में जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत सतही जल स्रोत पर आधारित वृहद पेयजल योजनाओं में ‘वाटर रिजर्वेशन‘ के विषय पर जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी एवं जल संसाधन मंत्री श्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय की अध्यक्षता में गुरुवार को शासन सचिवालय के कांफ्रेंस हॉल में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) एवं जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) की संयुक्त बैठक आयोजित हुई।बैठक में डॉ. जोशी एवं श्री मालवीय ने कहा कि प्रदेश में सतही जल स्रोतों से जेजेएम की पेयजल परियोजनाओं में अतिरिक्त पानी की उपलब्धता के लिए दोनों विभागों द्वारा आपसी समन्वय और सहयोग की भावना से सतत प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए है। आगे भी सभी स्तरों पर इसी प्रकार सामंजस्य से ‘वाटर रिजर्वेशन‘ के मुद्दे पर अधिकारी संयुक्त रूप से एक्सरसाईज करते हुए आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि जेजेएम के तहत मुख्यमंत्री की बजट घोषणा से सम्बंधित योजनाओं को समयबद्ध रूप से आगे बढ़ाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है, दोनों विभागों के अधिकारी इसी परिप्रेक्ष्य में तत्परता से निर्णय लेते हुए ‘जल आरक्षण‘ के लिए युक्तियुक्त समाधान का मार्ग प्रशस्त करें। बजट घोषणाओं से सम्बंधित परियोजनाओं के कार्यों को पूरा करना हमारी जिम्मेदारी है।जलदाय मंत्री एवं जल संसाधन मंत्री के समक्ष प्रस्तुतीकरण में बीसलपुर बांध से अजमेर जिले की 6, जयपुर की 5 एवं टोंक की 2, चम्बल नदी से धौलपुर, अलवर, भरतपुर एवं सवाईमाधोपुर जिलों की 4 तथा देवास-तृतीय एवं देवास-चतुर्थ से उदयपुर-मानसी वाकल तृतीय व चतुर्थ और वहां से उदयपुर एवं जवाई बांध में डायजर्वन के आधार पर प्रस्तावित पेयजल परियोजनाओं में ‘वाटर रिजर्वेशन‘ के बारे में विचार विमर्श किया गया। डॉ. जोशी एवं श्री मालवीय ने अधिकारियों से कहा कि प्रदेश में सतही जल स्रोतों से व्यर्थ बह कर चले जाने वाले पानी को संरक्षित कर उपयोग में लेने के उद्देश्य से प्रोजेक्ट तैयार करने की संभावनाएं भी तलाशें।बैठक में बताया गया कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र में दोनों विभागों के संयुक्त प्रयासों से जेजेएम के तहत चार एस्कैप रिजर्वायर्स बनाने की स्वीकृति मिली है। इस दौरान इंदिरा गांधी नहर परियोजना से वर्ष 2054 तक की आवश्यकताओं के अनुसार बीकानेर, श्री गंगानगर, हनुमानगढ़, जोधपुर, नागौर, जैसलमेर, बाड़मेर, झुंझुनू, चुरू एवं सीकर जिलों तथा चम्बल एवं माही डैम से राजसमंद, उदयपुर, प्रतापगढ़ एवं चितौड़गढ़ जिलों में जेजेएम से सम्बंधित वृहद पेयजल परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त जल उपलब्ध कराने के बारे में भी चर्चा की गई।जलदाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधांश पंत ने बैठक में बताया कि जेजेएम के तहत प्रदेश में वर्ष 2024 तक लगभग 90 लाख ‘हर घर जल‘ कनेक्शन दिए जाने है, इनमें से सतही जल स्रोतों पर आधारित कई वृहद पेयजल परियोजनाओं के ‘वाटर रिजर्वेशन‘ पर जल संसाधन विभाग के साथ सहमति बनी है। इसके बाद पीएचईडी द्वारा कई मेजर प्रोजेक्ट्स में तकनीकी स्वीकृतियों, निविदाओं और कार्यादेश से सम्बंधित कार्यों को गति दी गई है। जल संसाधन विभाग के शासन सचिव एवं जेजेएम के मिशन निदेशक डॉ. पृथ्वीराज ने बैठक में विचाराधीन प्रकरणों पर अपनी बात रखीं। उन्होंने बताया कि बताया कि जेजेएम में लाभान्वित परिवारों को 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के हिसाब से पेयजल उपलब्ध कराने का प्रावधान है, योजनाओं को इसी आधार पर डिजाइन किया जा रहा है।बैठक में जलदाय विभाग की संयुक्त शासन सचिव श्रीमती पुष्पा सत्यानी, मुख्य अभियंता (शहरी एवं एनआरडब्ल्यू) श्री सीएम चौहान, मुख्य अभियंता (विशेष प्रोजेक्ट्स) श्री दलीप कुमार गौड़ व मुख्य अभियंता (तकनीकी) श्री संदीप शर्मा, आईजीएनपी बोर्ड के सचिव श्री देशराज मीना, जल संसाधन विभाग में मुख्य अभियन्ता-स्टेट वाटर प्लानिंग बोर्ड श्री रवि सोलंकी तथा जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता श्री असीम मार्कण्डेय के अलावा दोनों विभागों के अन्य सम्बंधित अधिकारी मौजूद रहे।——

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