Rajasthan : तो क्या सचिन पायलट के बगैर राजस्थान में कांग्रेस सरकार रिपीट हो जाएगी?

Rajasthan : तो क्या सचिन पायलट के बगैर राजस्थान में कांग्रेस सरकार रिपीट हो जाएगी?

Rajasthan : तो क्या सचिन पायलट के बगैर राजस्थान में कांग्रेस सरकार रिपीट हो जाएगी?
कांग्रेस के जयपुर अधिवेशन में नजर नहीं आए पायलट। अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री रहते कांग्रेस की सरकार कभी रिपीट नहीं हुई।
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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बार बार कहना है कि इस बार सत्ता विरोधी लहर नहीं है, इसलिए दिसंबर 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार रिपीट होगी। गहलोत ने यह बात 19 फरवरी को जयपुर में हुए कांग्रेस के खुले अधिवेशन में भी कही। इस अधिवेशन में प्रदेश कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों, विधायकों, 2018 के चुनाव में उम्मीदवार रहे नेताओं, भंग जिला कमेटियों के अध्यक्षों आदि को बुलाया गया। लेकिन इस अधिवेशन में सचिन पायलट कहीं भी नजर नहीं आए, जबकि 2018 के चुनाव में पायलट की मेहनत से ही कांग्रेस की सरकार बनी थी।
सवाल उठता है क्या पायलट के बगैर राजस्थान में कांग्रेस सरकार रिपीट हो सकती है? 19 फरवरी को यह पहला मौका नहीं रहा, जब संगठन और सरकार के महत्वपूर्ण अवसर पर पायलट की अनदेखी की गई हो। इससे पहले भी कई अवसरों पर पायलट की उपस्थिति नहीं हुई है। हर अवसर पर सीएम गहलोत यही दिखाने का प्रयास कर रहे है कि उन्हीं के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार रिपीट हो जाएगी। गहलोत समर्थक कह सकते हें कि पायलट यूपी और पंजाब के चुनाव में व्यस्त है, इसलिए 19 फरवरी को जयपुर के अधिवेशन में भाग नहीं ले सके। पायलट जैसी व्यस्तता तो प्रभारी महासचिव अजय माकन की भी थी,
लेकिन माकन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जोड़ा गया। क्या माकन की तरह पायलट को नहीं जोड़ा जा सकता था? यूपी और पंजाब चुनाव के दौरान ही आज तक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में पायलट ने कहा कि राजस्थान में अब चुनाव के 15 माह रह गए हैं और कांग्रेस सरकार के रिपीट के लिए बहुत कुछ किया जाना चाहिए। यानी सचिन पायलट मुख्यमंत्री गहलोत की इस बात से सहमत नहीं है कि इस बार सत्ता विरोधी लहर नहीं है।
सीएम गहलोत ने अपने नजरिए से हाल ही में 58 सरकारी संस्थानों में कांग्रेस के नेताओं को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है, लेकिन इसके बाद भी पायलट का मानना है कि भाजपा के पिछले शासन में जिन कार्यकर्ताओं ने संघर्ष किया, उन्हें सरकार में मान सम्मान मिलना चाहिए। पायलट का ताजा इंटरव्यू बताता है कि सीएम गहलोत ने जो राजनीतिक जाजम अभी तक बिछाई है उससे पायलट संतुष्ट नहीं है। सीएम गहलोत को भले ही सत्ता विरोध लहर नजर नहीं आती हो, लेकिन 19 फरवरी के अधिवेशन में विधायकों, मुख्यमंत्री के सलाहकारों और संगठन के पदाधिकारियों ने विभिन्न मुद्दों पर अपनी नाराजगी जताई। जिन विधायकों को अभी तक भी मंत्री पद या अन्य सरकारी पद नहीं मिला है, उन्होंने साफ कहा कि अधिकारियों के रवैये के कारण आम लोगों में नाराजगी है।
अधिवेशन में मुख्यमंत्री के अलावा कोई भी नेता संतुष्ट नजर नहीं आया। अधिवेशन में सरकार के मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों ने भाजपा को कोसने में तो कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन अपनी सरकार की खामियां भी उजागर की। अशोक गहलोत को भले ही सत्ता विरोधी लहर का अहसास नहीं हो रहा हो, लेकिन यह सच है कि अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री रहते कभी भी कांग्रेस सरकार रिपीट नहीं हुई है। उल्टे हर बार कांग्रेस को बुरी हार का सामना करना पड़ा है।
2003 में गहलोत के मुख्यमंत्री रहते हुए कांग्रेस को 200 में से 58 सीटें मिली, जबकि 2013 में तो कांग्रेस को सिर्फ 21 सीटें ही मिलीं। 2013 की बुरी हार के बाद ही सचिन पायलट को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। 2018 के चुनाव में कांग्रेस को 100 सीटें मिली, लेकिन तब कांग्रेस ने पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के बजाए गहलोत को बनाया। जुलाई 2020 में सचिन पायलट की प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से बर्खास्तगी के बाद कांग्रेस की जिला कमेटियों को भी भंग कर दिया था। आज डेढ़ साल बाद भी जिला कमेटियां भंग पड़ी है।

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