कोटा/गंगापुर सिटी। पश्चिम-मध्य रेलवे (WCR) ने रेल परिचालन को सुगम बनाने और क्रू प्रबंधन को बेहतर करने के लिए कई बड़े बदलाव किए हैं। 31 दिसंबर को प्रमुख मुख्य परिचालन प्रबंधक कुशाल सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय वर्चुअल बैठक में कोटा, आगरा, जबलपुर और भोपाल मंडलों के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। हालांकि, इन फैसलों में से 'टूंडला वर्किंग' के मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है और गंगापुर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि कोटा और आगरा डिवीजन के बीच क्रू की उपलब्धता बढ़ाने के लिए गंगापुर और टूंडला के रनिंग स्टाफ को 50-50 के अनुपात में वितरित किया जाएगा।
व्यवस्था: गंगापुर का क्रू गंगापुर से बयाना तक और आगरा का क्रू टूंडला से बयाना तक 'यू-लिंक' सेवा पर कार्य करेगा।
लक्ष्य: यह सुनिश्चित करना कि कोई भी क्रू सदस्य बिना काम के (अतिरिक्त रूप से) वापस न लौटे।
कोटा लॉबी के काम को हल्का करने के लिए सोगरिया स्टेशन पर एक सहयोगी लॉबी खोलने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान में सोगरिया के लिए स्टाफ कोटा से बुक होता है। इसके साथ ही:
कोटा लॉबी में कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए गंगापुर से 8-10 कर्मचारियों को अस्थायी रूप से कोटा भेजा जाएगा।
बयाना लॉबी को ठेके पर दिया जाएगा, जिससे 4 सहायक लोको पायलटों की सेवाएं सुरक्षित रहने की उम्मीद है।
कोटा यार्ड में 13 अतिरिक्त शंटरों की नियुक्ति होगी, जिसमें सेवानिवृत्त एलपीजी और सीएलआई को पुनः नियुक्त किया जा सकता है।
नाइट शिफ्ट मॉनिटरिंग: रात के समय ट्रेनों की देरी रोकने और निकासी की निगरानी के लिए कोटा स्टेशन पर समर्पित पर्यवेक्षी स्टाफ और टीएलसी के साथ निरीक्षण कर्मचारी तैनात रहेंगे।
क्रू कंट्रोलर: व्यस्त समय में कर्मचारियों के काम के घंटों को कम करने के लिए अतिरिक्त क्रू कंट्रोलर लगाए जाएंगे।
वाहन सुविधा: कर्मचारियों की आवाजाही के लिए भोपाल और कोटा मंडल 2-2 सड़क वाहन (टैक्सी) उपलब्ध कराएंगे।
रेलवे के इस नए फॉर्मूले का गंगापुर में कड़ा विरोध शुरू हो गया है। वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ ने शुक्रवार को गंगापुर स्टेशन पर जोरदार प्रदर्शन किया।
मजदूर संघ नेता डी.के. शर्मा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:
"जब से रेलवे बनी है, गंगापुर का स्टाफ ही टूंडला तक वर्किंग कर रहा है। अब इस अधिकार को टूंडला स्टाफ के साथ बांटना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन अपनी हठधर्मिता छोड़े, अन्यथा यह आंदोलन पूरे मंडल में फैल जाएगा।"
कर्मचारियों का कहना है कि इस फैसले से उनके माइलेज और कार्यक्षेत्र पर सीधा असर पड़ेगा। फिलहाल, प्रशासन परिचालन दक्षता का हवाला दे रहा है, लेकिन कर्मचारियों की नाराजगी आने वाले दिनों में रेलवे के लिए चुनौती बन सकती है।
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