कोटा रेलवे वर्कशॉप में फिर धधका सिलेंडर: 25 दिन में दूसरी आगजनी, सुरक्षा मानकों की उड़ रही धज्जियां

कोटा रेलवे वर्कशॉप में फिर धधका सिलेंडर: 25 दिन में दूसरी आगजनी, सुरक्षा मानकों की उड़ रही धज्जियां

कोटा। रेलवे माल डिब्बा मरम्मत कारखाने (वर्कशॉप) में सुरक्षा इंतजामों की पोल एक बार फिर खुल गई है। गुरुवार सुबह वर्कशॉप में एक गैस सिलेंडर में अचानक आग लग गई। गनीमत यह रही कि सिलेंडर फटा नहीं, वरना एक बार फिर बड़ा जानी नुकसान हो सकता था। हैरानी की बात यह है कि पिछले महीने हुए दर्दनाक हादसे के मात्र 25 दिन के भीतर यह दूसरी घटना है।

कैसे हुआ हादसा?

प्रत्यक्षदर्शी कर्मचारियों के अनुसार, घटना गुरुवार सुबह लगभग 9:30 बजे की है। दो अप्रेंटिस (प्रशिक्षु) एक ट्रॉली पर डीए गैस सिलेंडर को बाहर निकाल रहे थे। इसी दौरान अचानक एक लीकेज सिलेंडर ने आग पकड़ ली। आग की लपटें देख मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए इधर-बधर भागे। बाद में अग्निशमन उपकरणों की मदद से आग पर काबू पाया गया।

प्रशासन की लापरवाही: अनुभवहीन हाथों में जोखिम भरा काम

हादसे के बाद वर्कशॉप कर्मचारियों ने प्रशासन के खिलाफ भारी रोष व्यक्त किया है। कर्मचारियों के मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:

  • नियमों का उल्लंघन: सुरक्षा नियमों के अनुसार, सिलेंडर ट्रॉली के संचालन के समय दो में से एक स्थाई कर्मचारी का होना अनिवार्य है, लेकिन प्रशासन ने जोखिम भरे इस काम में दो अप्रेंटिसों को लगा रखा था।

  • अनुभव की कमी: पहले इन ट्रॉलियों पर अनुभवी हेल्पर तैनात होते थे। अब चंद दिनों पहले भर्ती हुए प्रशिक्षुओं से काम कराया जा रहा है, जिन्हें तकनीकी बारीकियों का पर्याप्त ज्ञान नहीं है।

  • पिछले हादसे से नहीं लिया सबक: बीते 16 दिसंबर को भी इसी तरह लीकेज सिलेंडर में आग लगी थी, जिसमें कर्मचारी सगीर मोहम्मद गंभीर रूप से झुलस गए थे और 13 दिन बाद उनकी मौत हो गई थी।

अधिकारियों का रवैया: 'हादसा मामूली है'

एक तरफ जहाँ कर्मचारी डरे हुए हैं और सगीर मोहम्मद की मौत के मामले में गठित चार सदस्यीय कमेटी की जांच रिपोर्ट का अब तक पता नहीं है, वहीं दूसरी ओर वर्कशॉप अधिकारी इस घटना को 'मामूली' बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि कोई नुकसान नहीं हुआ और आग पर तुरंत काबू पा लिया गया। हालांकि, घटना के बाद दिनभर अधिकारी वर्कशॉप में खामियों को दुरुस्त करने के निर्देश देते नजर आए।

सुरक्षा पर सवाल

रेलवे कर्मचारी परिषद ने बार-बार अनुभवी स्टाफ लगाने की मांग की है, लेकिन प्रशासन की अनदेखी जारी है। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

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