कोटा/बरूंदनी। कोटा रेल मंडल के कोटा-चित्तौड़गढ़ रेल खंड पर बुधवार शाम एक ऐसी दर्दनाक घटना घटी जिसने हर किसी की आँखें नम कर दीं। बरूंदनी और सिंगोली स्टेशन के बीच स्थित रेलवे फाटक संख्या 96 पर तैनात गेटमैन हरिओम अहिरवार (30) ने अपने ढाई साल के मासूम बच्चे की जान बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।
घटना बुधवार शाम करीब 4 बजे की है। हरिओम अहिरवार गेट के पास ही बने रेलवे क्वार्टर में अपने परिवार के साथ रहते थे। ड्यूटी के दौरान उनका छोटा बच्चा खेलते-खेलते अचानक रेल पटरी पर पहुँच गया। उसी समय बिजली लाइनों के रखरखाव में इस्तेमाल होने वाली टावर वैगन कोटा की ओर लौट रही थी और उसके आने के सिग्नल हो चुके थे।
पटरी पर मौत की तरह बढ़ती टावर वैगन को देख हरिओम ने आव देखा न ताव और बच्चे की ओर दौड़ लगा दी। उन्होंने फुर्ती से बच्चे को पटरी से दूर धकेल दिया, जिससे मासूम की जान तो बच गई, लेकिन अफसोस कि हरिओम खुद को नहीं बचा सके। टावर वैगन की चपेट में आने से उनके सिर और गर्दन पर गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई।
सूचना मिलते ही कोटा से रेलवे अधिकारी और भीलवाड़ा की बीगोद थाना पुलिस मौके पर पहुँची।
रेलवे की कार्रवाई: प्रशासन ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
सवालों के घेरे में चालक: अधिकारी टीआरडी (TRD) कर्मचारियों और वैगन चालक से पूछताछ कर रहे हैं कि क्या वैगन की रफ्तार अधिक थी? क्या दूर से पटरी पर मौजूद व्यक्ति नजर नहीं आया? और समय रहते इमरजेंसी ब्रेक क्यों नहीं लग सके?
हरिओम मांडलगढ़ रेल पथ सुपरवाइजर के अधीन कार्यरत थे। इस हादसे के बाद उनकी पत्नी और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। साथी कर्मचारियों ने बताया कि हरिओम एक बेहद मिलनसार और कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी थे। गुरुवार को मांडलगढ़ के सरकारी अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा।
रेलवे कर्मचारियों के अनुसार, टावर वैगन से दुर्घटना का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार टावर वैगन की चपेट में आने से रेल कर्मियों और आम लोगों की जान जा चुकी है। यह घटना रेलवे सुरक्षा और टावर वैगन के संचालन नियमों पर फिर से सवाल खड़े करती है।
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