कोटा: कोटा रेलवे यार्ड में शनिवार दोपहर एक मालगाड़ी के बेपटरी होने से हड़कंप मच गया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि घटना यार्ड के भीतर हुई, जिससे मुख्य रेल यातायात पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा और न ही किसी के हताहत होने की सूचना है। लेकिन इस घटना ने रेलवे की कार्यप्रणाली और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, दोपहर करीब 3:05 बजे मालगाड़ी की शंटिंग की जा रही थी ताकि उसे माल गोदाम तक पहुँचाया जा सके। इसी दौरान ट्रेन का एक डिब्बा पटरी से उतर गया। सूचना मिलते ही मोबाइल एमएफडी (MFD) की टीम मौके पर पहुँची और हाइड्रोलिक जैक की मदद से करीब 3:55 बजे डिब्बे को वापस पटरी पर चढ़ाया गया।
जांच में सामने आया है कि यह हादसा पटरी के किनारे पड़े लोहे के तारों के बंडलों की वजह से हुआ।
मालगाड़ी के कलपुर्जे पटरी के पास पड़े तारों के भारी-भरकम बंडल में उलझ गए।
दबाव के कारण धीमी गति से चल रही मालगाड़ी का पीछे से तीसरा डिब्बा पटरी छोड़ गया।
बताया जा रहा है कि ये बंडल कुछ समय पहले ही एक अन्य मालगाड़ी से खाली किए गए थे, जिन्हें पटरी से सुरक्षित दूरी पर नहीं हटाया गया था।
इस पूरी घटना में दो बड़ी चूक उजागर हुई हैं:
जरूरत से बड़ा रेक: माल गोदाम द्वारा केवल 21 डिब्बों के रेक की मांग की गई थी, लेकिन मौके पर 42 डिब्बों का विशाल रेक भेजा जा रहा था। यदि रेक छोटा होता, तो शंटिंग के दौरान गाड़ी इतनी पीछे तक नहीं जाती और हादसा टल सकता था।
नहीं बजा हूटर: आश्चर्यजनक बात यह रही कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी डीआरएम (DRM) ऑफिस में लगा हुटर नहीं बजाया गया। अधिकारियों और दुर्घटना राहत वैन को फोन के जरिए सूचना दी गई। यह पहली बार नहीं है जब आपातकालीन स्थिति में हूटर का उपयोग न किया गया हो।
यह घटना उस समय हुई जब प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक अरविंद कुमार कोटा के दौरे पर थे। उनका माल गोदाम जाने का भी कार्यक्रम तय था, लेकिन इस दुर्घटना के बाद उनका दौरा रद्द कर दिया गया। फिलहाल रेलवे अधिकारी मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों की गई।
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