कोटा। कोटा रेल मंडल में ढाई साल पहले हुई लोको निरीक्षक (LI) पदोन्नति परीक्षा में भ्रष्टाचार के गंभीर मामले में नया मोड़ आया है। CBI ने अपनी जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि मूल्यांकन अधिकारी ने पद का दुरुपयोग कर ओएमआर शीट (OMR Sheet) में हेरफेर की, जिससे एक विशेष उम्मीदवार को अनुचित लाभ मिला। हालांकि, तकनीकी आधार पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने लोकपाल के पिछले आदेशों को रद्द कर दिया है।
सीबीआई ने दस्तावेजों, सीडीआर (कॉल रिकॉर्ड्स) और CFSL भोपाल की रिपोर्ट के आधार पर पाया कि:
शीट में विसंगति: उम्मीदवार की मूल ओएमआर शीट और कार्बन कॉपी में अंतर पाया गया। कुछ गोलों को बाद में भरा गया या हेरफेर की गई।
अधिकारी-उम्मीदवार कनेक्शन: जब ओएमआर शीट मूल्यांकन अधिकारी के पास थी, तब अधिकारी और उम्मीदवार के बीच लगातार बातचीत हुई।
अनुचित लाभ: इस जालसाजी के कारण संबंधित उम्मीदवार ने परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त किए और वर्तमान में वह मुख्य लोको निरीक्षक (CLI) के पद पर कार्यरत है।
इस मामले में आरोपी उम्मीदवार ने दिल्ली उच्च न्यायालय में लोकपाल के आदेशों को चुनौती दी थी।
अदालत का फैसला: न्यायालय ने पाया कि लोकपाल अधिनियम की धारा 20(3) के तहत आरोपी को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया।
नया निर्देश: कोर्ट ने लोकपाल के पुराने आदेश रद्द कर दिए, लेकिन यह छूट दी कि नियमों का पालन करते हुए नए सिरे से कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
लोकपाल की सिफारिश पर सीबीआई ने तत्कालीन Sr. DEE (TRD), DPO, APO और तीन अन्य कर्मचारियों (COS, COS गोपनीय, और CLI) के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की विभिन्न धाराओं (धोखाधड़ी, जालसाजी, साजिश) के तहत मामला दर्ज किया था।
मई 2023: 5 पदों के लिए परीक्षा हुई, 96 लोको पायलट शामिल हुए।
सितंबर 2023: रिजल्ट में गड़बड़ी के आरोप लगे। रेलवे विजिलेंस ने जांच तो की, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं की।
लोकपाल: विजिलेंस की ढिलाई देख मामला लोकपाल पहुँचा, जिन्होंने इसे जयपुर सीबीआई को सौंपा।
बचाव का रास्ता: जांच शुरू होते ही एक सीओएस ने वीआरएस (VRS) ले लिया और दूसरा सेवानिवृत्त हो गया।
कोटा रेल मंडल के इतिहास में यह दूसरी बार है जब सीबीआई ने सीधे डीआरएम कार्यालय में भ्रष्टाचार के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है।
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