करोड़ों के नए स्टेशनों की बिगड़ी रंगत; उखड़ी टाइलें, दीवारों में दरारें और रेल आवासों पर ठेकेदारों का 'कब्जा'

करोड़ों के नए स्टेशनों की बिगड़ी रंगत; उखड़ी टाइलें, दीवारों में दरारें और रेल आवासों पर ठेकेदारों का 'कब्जा'

कोटा। रामगंजमंडी-भोपाल रेल परियोजना के तहत नवनिर्मित झालावाड़ सिटी, अकलेरा और झालरापाटन जैसे स्टेशनों की हालत कुछ ही सालों में खंडहर जैसी होने लगी है। घटिया निर्माण सामग्री और लचर निगरानी के चलते यात्री सुविधाओं का बुरा हाल है। बुधवार को पश्चिम-मध्य रेलवे (WCR) की महाप्रबंधक शोभना बंदोपाध्याय इस रेलखंड का दौरा करेंगी, जिससे यात्रियों में इन समस्याओं के समाधान की उम्मीद जगी है।

स्टेशनों की बदहाली: कहाँ क्या है हाल?

1. अकलेरा स्टेशन: उखड़े वाटर बूथ अकलेरा स्टेशन पर यात्रियों के लिए बनाए गए वाटर बूथों से टाइलें उखड़कर गिर रही हैं। स्टेशन की सुंदरता और स्वच्छता के दावों के बीच ये वाटर बूथ अब भद्दे और असुरक्षित नजर आ रहे हैं।

2. झालावाड़ सिटी: फर्श और दीवारों में दरारें झालावाड़ सिटी स्टेशन के फर्श पर बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं, जो बारिश के मौसम में गंभीर खतरा बन सकती हैं। न केवल फर्श, बल्कि एक कार्यालय की दीवार में भी दरारें देखी गई हैं। प्लेटफार्म का किनारा (Coping) भी कई जगह से टूटा हुआ है।

3. झालरापाटन: शौचालय बेहाल झालरापाटन स्टेशन पर यात्रियों के लिए बने शौचालयों के दरवाजे टूट चुके हैं, जिससे यात्री इनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। दीवारों पर भारी सीलन आ रही है, जो निर्माण की खराब गुणवत्ता को दर्शाती है।


रेल आवासों पर ठेकेदारों का 'फ्री' राज

इस रेलखंड में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। झालरापाटन सहित अन्य स्टेशनों पर नवनिर्मित टाइप-3 रेल आवासों पर ठेकेदारों ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है।

  • ठेकेदार न केवल इन आवासों में रह रहे हैं, बल्कि अपना सामान भी यहीं डंप कर रखा है।

  • चौंकाने वाली बात यह है कि ये ठेकेदार रेलवे की बिजली और पानी का मुफ्त में उपयोग कर रहे हैं, जिससे रेलवे को वित्तीय चपत लग रही है।

मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति

पिछले दिनों घटिया निर्माण का मामला उठने के बाद प्रशासन ने मरम्मत के आदेश दिए थे, लेकिन स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ गई है:

  • अधूरा काम: कई आवासों के किचन और शौचालय में ठेकेदार तोड़फोड़ करके गायब हो गए हैं, जिससे रेल कर्मचारी परेशान हैं।

  • केबल हादसा: हाल ही में बिछाई गई घटिया केबल में आग लगने की घटना हुई थी, लेकिन अभी तक नई केबल डालने का काम शुरू नहीं हो सका है।

जीएम के दौरे से उम्मीद, पर संशय भी

महाप्रबंधक शोभना बंदोपाध्याय का यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, चर्चा यह भी है कि इसी महीने उनका रिटायरमेंट होने के कारण क्या वे इन गंभीर अनियमितताओं और दोषी ठेकेदारों पर कोई सख्त कार्रवाई कर पाएंगी?


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