भवानीमंडी स्टेशन पर 'संतरा सिंडिकेट' सक्रिय: बिना बुकिंग रोज ट्रेन में चढ़ रहे 200 कट्टे, यात्रियों का सफर हुआ दूभर

भवानीमंडी स्टेशन पर 'संतरा सिंडिकेट' सक्रिय: बिना बुकिंग रोज ट्रेन में चढ़ रहे 200 कट्टे, यात्रियों का सफर हुआ दूभर

भवानीमंडी/कोटा। दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर स्थित भवानीमंडी रेलवे स्टेशन इन दिनों अवैध रूप से संतरा परिवहन का बड़ा केंद्र बन गया है। सीजन की आड़ में हर रोज लगभग 200 से अधिक संतरे के कट्टे बिना किसी रेलवे बुकिंग के ट्रेनों में चढ़ाए जा रहे हैं। इस अवैध कारोबार से जहाँ रेलवे को लाखों के राजस्व का चूना लग रहा है, वहीं आम यात्रियों का ट्रेनों में बैठना तक मुहाल हो गया है।

कोटा-बड़ौदा पार्सल ट्रेन बनी 'मालगाड़ी'

यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत कोटा-बड़ौदा पार्सल ट्रेन (19820) को लेकर है। इस ट्रेन के लगभग हर डिब्बे में, यहाँ तक कि शौचालयों के गेट तक संतरों के कट्टे भरे रहते हैं।

  • यात्रियों की परेशानी: कट्टों के कारण डिब्बों में पैर रखने तक की जगह नहीं बचती। दुर्गंध और गंदगी के कारण यात्रियों को घंटों का सफर नारकीय स्थिति में काटना पड़ता है।

  • रूट का खेल: ये कट्टे भवानीमंडी से चढ़ाए जाते हैं और रतलाम-बड़ौदा के बीच झाबुआ जैसे स्टेशनों पर अवैध रूप से उतारे जाते हैं।

10-20 रुपये की 'रिश्वत' और मिलीभगत का खेल

सूत्रों के अनुसार, यह पूरा खेल रेलवे के कुछ जिम्मेदार कर्मचारियों की नाक के नीचे चल रहा है। आरोप है कि:

  • प्रति कट्टा 10 से 20 रुपये की रिश्वत लेकर इन कट्टों को ट्रेन में चढ़ाने की अघोषित अनुमति दी जाती है।

  • हैरानी की बात यह है कि स्टेशन पर सभी जिम्मेदार अधिकारियों के दफ्तर होने के बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में माल का अवैध परिवहन बेरोकटोक जारी है।

रेलवे को लाखों का घाटा

भवानीमंडी क्षेत्र संतरा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इसका फायदा रेलवे को मिलने के बजाय कुछ भ्रष्ट लोगों की जेब में जा रहा है।

  • बिना आधिकारिक बुकिंग (Parcel Booking) के माल भेजने से रेलवे को हर साल लाखों रुपये के किराए का नुकसान हो रहा है।

  • यात्रियों ने कई बार स्टेशन प्रशासन से शिकायत की, लेकिन 'हफ्ता वसूली' के चलते अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

क्या कहते हैं यात्री?

"ट्रेन के डिब्बे अब इंसानों के बैठने लायक नहीं रहे। हर तरफ संतरों के कट्टे भरे रहते हैं। विरोध करने पर माल ले जाने वाले लोग झगड़े पर उतारू हो जाते हैं और रेलवे स्टाफ मूकदर्शक बना रहता है।" - एक पीड़ित यात्री


प्रमुख मुद्दे एक नज़र में:

समस्या प्रभाव
अवैध माल प्रतिदिन 200+ अनबुक्ड संतरे के कट्टे
भ्रष्टाचार 10-20 रुपये प्रति कट्टा कथित रिश्वत
प्रभावित ट्रेन कोटा-बड़ौदा पार्सल ट्रेन (19820)
रेलवे को नुकसान हर साल लाखों रुपये के राजस्व की हानि

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