राजस्थान: नकली दूध के खेल में बड़ा एक्शन; खाद्य सुरक्षा अधिकारी APO, दो पुलिस कांस्टेबल निलंबित

राजस्थान: नकली दूध के खेल में बड़ा एक्शन; खाद्य सुरक्षा अधिकारी APO, दो पुलिस कांस्टेबल निलंबित

टोंक। राजस्थान के टोंक जिले में नकली दूध के काले कारोबार के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर गाज गिराई है। डिग्गी कस्बे में पकड़ी गई नकली दूध की फैक्ट्री के मामले में पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार मीणा ने दो कांस्टेबलों को निलंबित कर दिया है, वहीं स्वास्थ्य विभाग ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी (FSO) को एपीओ (APO) कर जयपुर मुख्यालय अटैच कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

बीती 2 जनवरी को जिला विशेष टीम (DST) और डिग्गी थाना पुलिस ने एक संयुक्त कार्रवाई में मिलावटी दूध बनाने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया था। मौके से प्रशासन ने चौंकाने वाले आंकड़े बरामद किए:

  • 5,500 लीटर तैयार मिलावटी दूध।

  • 3,000 किलो मिल्क पाउडर और 105 किलो कास्टिक सोडा।

  • 2,100 लीटर सोयाबीन ऑयल और 500 लीटर वनस्पति घी।

  • 5 पिकअप गाड़ियां और 1 टैंकर

जांच में सामने आया कि फैक्ट्री का संचालन बहरोड़ निवासी सोनू यादव कर रहा था, जिसकी तलाश जारी है। पुलिस ने मौके से पांच आरोपियों (राजू, कालू, महिपाल, शिवराज और ओम प्रकाश) को गिरफ्तार किया है।

जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल: नकली को बताया था असली

इस मामले में सबसे गंभीर लापरवाही खाद्य सुरक्षा अधिकारी मदन लाल गुर्जर की सामने आई है। विभागीय जानकारी के अनुसार, पुलिस की छापेमारी से करीब 10-11 दिन पहले गुर्जर ने इसी फैक्ट्री से दूध के 3-4 नमूने लिए थे। हैरानी की बात यह है कि उन नमूनों की रिपोर्ट में दूध को 'शुद्ध और मानक के अनुरूप' बताया गया था।

जब DST ने छापा मारा, तो वहां भारी मात्रा में केमिकल और कास्टिक सोडा मिला, जिसने पूर्व में दी गई 'क्लीन चिट' और विभागीय मिलीभगत की पोल खोल दी। इसी के चलते सीएमएचओ शैलेंद्र चौधरी ने अधिकारी को कार्यमुक्त कर दिया है।

पुलिस महकमे में भी गाज

क्षेत्र में इतने बड़े स्तर पर अवैध गतिविधि चलने की सूचना उच्च अधिकारियों तक न पहुंचाने और निगरानी में विफलता पर पुलिस ने भी कड़ा रुख अपनाया है।

  1. रामचरण (कांस्टेबल): स्थानीय आसूचना अधिकारी।

  2. सज्जन सिंह (कांस्टेबल): बीट कांस्टेबल। इन दोनों को एसपी ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

तीन जिलों की सेहत से खिलवाड़

जांच में खुलासा हुआ है कि यह फैक्ट्री कोई छोटी-मोटी इकाई नहीं थी। यहाँ से प्रतिदिन लगभग 80,000 लीटर नकली दूध तैयार कर जयपुर, टोंक और अजमेर के बाजारों में सप्लाई किया जाता था। सोयाबीन तेल और कास्टिक सोडा जैसे खतरनाक रसायनों से बना यह दूध हजारों लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बना हुआ था।


प्रशासनिक संदेश: यह कार्रवाई उन अधिकारियों के लिए चेतावनी है जो मिलावटखोरों के साथ साठगांठ कर जनता की सेहत से समझौता करते हैं। मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है।

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