कोटा | कोटा स्थित रेलवे माल डिब्बा मरम्मत कारखाना (वर्कशॉप) में टेंडर प्रक्रिया में भारी अनियमितता का मामला गरमाता जा रहा है। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर चहेती फर्म को फायदा पहुँचाया गया, जिससे रेलवे को सीधे तौर पर करीब 4.16 लाख रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसकी शिकायत केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और रेलवे विजिलेंस तक पहुँच गई है।
गत वर्ष अगस्त में वर्कशॉप ने डर्ट कलेक्टर की ओवरहोलिंग और टेस्टिंग के लिए 22 लाख 94 हजार 700 रुपये का दो वर्षीय टेंडर निकाला था। इस प्रक्रिया में कुल 6 कंपनियों ने भाग लिया।
टेंडर में शामिल कंपनियों की दरों का गणित कुछ इस प्रकार था:
केके इंजीनियर (घनश्याम कंसोटिया): 11.11% कम (सबसे कम दर - L1)
सैमुअल फैब्रिकेशन: 9.80% कम (L2)
मैकेनिकल एनर्जी: 5.80% कम (L3)
विश्वकर्मा आकृति: 5% अधिक (L4)
कुशवाहा सर्विस: 7% अधिक (L5) - टेंडर इसे दिया गया
आरोप है कि रेलवे ने सबसे कम दर देने वाली पहली तीन कंपनियों को बिना किसी ठोस कारण या सूचना के दरकिनार कर दिया और पांचवें नंबर की फर्म 'कुशवाहा सर्विस' को ऊँची दरों पर काम सौंप दिया।
पीड़ित ठेकेदार घनश्याम कंसोटिया ने बताया कि उन्होंने वर्कशॉप अधिकारियों से इस संबंध में जवाब माँगा, लेकिन एक महीने बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। ट्विटर पर शिकायत करने पर मामला डीआरएम को रेफर कर दिया गया, जबकि वर्कशॉप के टेंडर से उनका सीधा संबंध नहीं होता। अंततः, उन्होंने केंद्रीय सतर्कता आयोग (नई दिल्ली) और पश्चिम मध्य रेलवे विजिलेंस में शिकायत दर्ज कराई है।
मामले के तूल पकड़ने पर मुख्य कारखाना प्रबंधक (CWM) सुधीर सरवरिया का कहना है कि उन्हें टेंडर में गड़बड़ी की कोई लिखित शिकायत फिलहाल नहीं मिली है, लेकिन वे इस पूरे मामले की जांच करवाएंगे।
हैशटैग: #RailwayScam #KotaWorkshop #WCR #TenderFraud #CVC #RailwayVigilance #CorruptionAlert #IndianRailways #KotaNews #FinancialLoss
No comments yet. Be the first to comment!
Please Login to comment.
© G News Portal. All Rights Reserved.