नई दिल्ली। 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारतीय ब्रह्मोस मिसाइल की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बढ़ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ऑपरेशन में भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई में ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि भारत ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है, लेकिन पाकिस्तान में इस मिसाइल से हुई तबाही की चर्चाएं आम हैं। इस घटनाक्रम के बाद कई देशों ने इस शक्तिशाली मिसाइल को खरीदने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है, जिसमें कुछ मुस्लिम राष्ट्र भी शामिल हैं।
ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण भारत के ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा किया गया है। यह भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस के NPO मशीनोस्ट्रोयेनिया के बीच एक संयुक्त उद्यम का परिणाम है। यह मिसाइल पनडुब्बियों, जहाजों, विमानों और जमीन आधारित प्लेटफार्मों से लॉन्च की जा सकती है। लगभग 300 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली यह मिसाइल 200 से 300 किलोग्राम तक का वारहेड ले जाने में सक्षम है और 2.8 मैक की सुपरसोनिक गति से उड़ान भरती है। अपनी अचूक सटीकता के लिए भी यह विश्व स्तर पर जानी जाती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई देशों ने पहले से ही ब्रह्मोस में रुचि दिखाई है। फिलीपींस ने जनवरी 2022 में भारत के साथ ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों का एक महत्वपूर्ण सौदा किया था, जिसके तहत भारत फिलीपींस को तीन खेप भेजने वाला है। भारत ने हाल ही में अप्रैल 2025 में इसकी दूसरी खेप फिलीपींस को सफलतापूर्वक वितरित कर दी है। इसके अलावा, भारत और इंडोनेशिया भी जल्द ही एक ऐसे ही सौदे को अंतिम रूप दे सकते हैं, जिस पर लगभग 450 मिलियन डॉलर का निवेश शामिल है और पिछले एक दशक से बातचीत चल रही है। वियतनाम भी अपनी सेना और नौसेना के आधुनिकीकरण के लिए ब्रह्मोस मिसाइलें खरीदने की योजना बना रहा है और भारत के साथ लगभग 700 मिलियन डॉलर का सौदा कर सकता है। मलेशिया भी अपने सुखोई Su-30MKM लड़ाकू विमानों और केदाह श्रेणी के युद्धपोतों के बदले ब्रह्मोस मिसाइलों का सौदा करने की संभावना तलाश रहा है।
इन देशों के अलावा, थाईलैंड, सिंगापुर, ब्रुनेई, ब्राजील, चिली, अर्जेंटीना, वेनेजुएला और मिस्र जैसे देशों ने भी ब्रह्मोस मिसाइलों में अपनी रुचि दिखाई है। महत्वपूर्ण रूप से, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और ओमान जैसे अरब देशों ने भी इस मिसाइल प्रणाली में गहरी दिलचस्पी दिखाई है।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के कई देश दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता को देखते हुए अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, ब्रह्मोस के उन्नत संस्करणों ने अरब देशों को भी अपनी ओर आकर्षित किया है, जो अपनी सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक विश्वसनीय और शक्तिशाली हथियार प्रणाली की तलाश में हैं। 'ऑपरेशन सिंदूर' में इस मिसाइल के कथित इस्तेमाल और उसकी प्रभावशीलता की खबरों के बाद इसकी मांग में और तेजी आने की संभावना है।
#ब्रह्मोस_मिसाइल #ऑपरेशन_सिंदूर #भारत #पाकिस्तान #रक्षा_सौदे #हथियार #मुस्लिम_देश #फिलीपींस #इंडोनेशिया #वियतनाम #मलेशिया #अरब_देश #रक्षा_निर्यात
No comments yet. Be the first to comment!
Please Login to comment.
© G News Portal. All Rights Reserved.