एक ही दिन में अजमेर के दो थानों के 6 पुलिस कर्मी लाइन हाजिर। इनमें केकड़ी के सीआई राजेश मीणा भी शामिल।

एक ही दिन में अजमेर के दो थानों के 6 पुलिस कर्मी लाइन हाजिर। इनमें केकड़ी के सीआई राजेश मीणा भी शामिल।

एक ही दिन में अजमेर के दो थानों के 6 पुलिस कर्मी लाइन हाजिर। इनमें केकड़ी के सीआई राजेश मीणा भी शामिल।

यदि बदसलूकी के कारण ही लाइन हाजिर किया है तो ऐसी बदसलूकी आम आदमी के साथ रोजाना होती है। तो क्या सिर्फ वकीलों से डरती है पुलिस?

एक अप्रैल को एक ही दिन में अजमेर जिले के दो थानों के 6 पुलिस कर्मियों को एक साथ लाइन हाजिर कर दिया गया। इनमें प्रदेश के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के निर्वाचन क्षेत्र केकड़ी थानाधिकारी राजेश मीणा भी शामिल हैं। मीणा के साथ कांस्टेबल रामराय, वीरेन्द्र और लोकेश को भी थाने से हटाकर अजमेर स्थित पुलिस लाइन में तैनात किया गया है। इसी प्रकार अजमेर शहर के दरगाह थाना पुलिस स्टेशन के हैड कांस्टेबल राकेश और कांस्टेबल दिनेश को भी लाइन हाजर किया गया है। केकड़ी पुलिस पर वकील पवन सिंह भाटी और दरगाह पुलिस पर वकील अजरुद्दीन के साथ पुलिस कर्मियों द्वारा बदसलूकी का आरोप है। इसे वकीलों की ताकत ही कहा जाएगा कि बगैर कोई जांच करवाए, पुलिस कर्मियों पर कार्यवाही कर दी गई। यदि बदसलूकी के कारण ही एक सीआई सहित 6 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्यवाही हुई तो ऐसी बदसलूकी आम आदमी के साथ आए दिन होती है। आम आदमी के साथ हुई बदसलूकी की खबरें अखबार में भी छपती है लेकिन उच्च अधिकारी कोई कार्यवाही नहीं करते हैं। राज्य के पुलिस महानिदेशक एमएल लाठर और जिला पुलिस अधीक्षक जगदीश चन्द्र शर्मा माने या नहीं, लेकिन आम आदमी के साथ हुई बदसलूकी की 80 प्रतिशत घटनाएं तो सामने आती ही नहीं है जो 20 प्रतिशत घटनाएं सामने आती हैं उन्हें जांच के नाम पर दफन कर दिया जाता है। थाने में बैठा थानाधिकारी आम लोगों के साथ किंग जैसा व्यवहार करता है। यही वजह है कि थाने के पुलिसकर्मी स्वयं को वजीर समझते हैं। ऐसे में आम आदमी का कोई सम्मान नहीं होता। कांस्टेबल की शिकायत सीआई नहीं सुनता तो सीआई के व्यवहार की शिकायत उच्च अधिकारी नहीं सुनते हैं। केकड़ी और दरगाह थाने पर इसलिए कार्यवाही हुई है कि शिकायतकर्ता वकील थे। यानि पुलिस सिर्फ वकीलों से ही डरती है। पुलिस के अधिकारियों को भी पता है कि यदि कार्यवाही नहीं की गई तो वकीलों का आंदोलन शुरू हो जाएगा। जबकि मौजूदा समय में सरकार कोई आंदोलन नहीं चाहती है। आंदोलन होता है तो सरकार बड़े अधिकारियों पर भी कार्यवाही कर सकती है। स्वयं पर कार्यवाही से बचने के लिए कांस्टेबल और हैडकांस्टेबल और सीआई को लाइन हाजिर कर दिया गया। जहां तक आम आदमी के साथ बदसलूकी का सवाल है तो विगत दिनों ही दरगाह पुलिस पर अनेक व्यापारियों ने आरोप लगाते थे। बड़े अधिकारियों को ज्ञापन भी दिए गए। अखबारों में खबरें भी छपीं। लेकिन व्यापारियों के साथ हुई बदसलूकी को गंभीरता से नहीं लिया। इस बार भी यदि शिकायतकर्ता अजहरुद्दीन वकील नहीं होता तो शिकायत का हाल व्यापारियों जैसा ही होता। अच्छा हो कि आम आदमी के साथ होने वाली बदसलूकी को भी गंभीरता से लिया जाए।

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