परीक्षा आवेदन की अंतिम तिथि 12 अगस्त है। जबकि अदालत में 13 अगस्त को सुनवाई होगी।

परीक्षा आवेदन की अंतिम तिथि 12 अगस्त है। जबकि अदालत में 13 अगस्त को सुनवाई होगी।

अतिरिक्त विद्यार्थियों पर जुर्माने के मामले में प्राइवेट कॉलेजों को जोधपुर हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। अब अजमेर में यूनिवर्सिटी के बाहर तम्बू गाढ़े।
परीक्षा आवेदन की अंतिम तिथि 12 अगस्त है। जबकि अदालत में 13 अगस्त को सुनवाई होगी।
दबाव में नहीं आएगा यूनिवर्सिटी प्रशासन-कुलपति ओम थानवी।
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अजमेर संभाग के कोई 80 हजार विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े मामले में 10 अगस्त को प्राइवेट कॉलेजों के मालिकों को जोधपुर हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिल पाई है। प्राइवेट कॉलेजों में स्वीकृति के बगैर प्रवेश देने के मामले में एमडीएस यूनिवर्सिटी में कॉलेज मालिकों पर प्रति विद्यार्थी 15 हजार रुपए जुर्माना लगाया है। यूनिवर्सिटी ने साफ किया है कि यदि कॉलेज मालिक अतिरिक्त विद्यार्थियों का जुर्माना जमा नहीं कराएंगे तो ऐसे विद्यार्थियों को स्वयंपाठी विद्यार्थी माना जाएगा। यूनिवर्सिटी के इस फैसले को प्राइवेट कॉलेज मालिकों ने जोधपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी।
याचिका पर 10 अगस्त को सुनवाई होनी थी, लेकिन सुनवाई होने से पहले ही कॉलेज मालिकों के वकील ने अगली तारीख निर्धारित करने का आग्रह किया। इस पर कोर्ट ने 13 अगस्त को सुनवाई करने का निर्णय लिया। यहां यह उल्लेखनीय है कि 100 रुपए विलंब शुल्क के साथ परीक्षा आवेदन की अंतिम तिथि 12 अगस्त है। यानी अब आवेदन की अंतिम तिथि के बाद ही हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। इस बीच यूनिवर्सिटी और कॉलेज मालिको के बीच चल रही खींचतान में अजमेर संभाग के 80 हजार विद्यार्थियों का भविष्य जुड़ा हुआ है। यह ऐसे विद्यार्थी हैं जिन्हें कॉलेजों में तो नियमित विद्यार्थी माना गया है, लेकिन यूनिवर्सिटी इन्हीं नियमित विद्यार्थी नहीं मान रही है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि मालिकों ने यूनिवर्सिटी की अनुमति के बगैर विद्यार्थियों को प्रवेश दिया है। अब ऐसे कॉलेज मालिकों को अतिरिक्त विद्यार्थियों के लिए प्रति विद्यार्थी 15 हजार रुपए की जुर्माना राशि जमा करानी होगी। इससे यूनिवर्सिटी को 120 करोड़ रुपए आय होगी।
यूनिवर्सिटी के बाहर तंबू:
कॉलेज मालिकों ने भले ही हाईकोर्ट में सुनवाई टलवा दी हो, लेकिन 10 अगस्त को अजमेर में एमडीएस यूनिवर्सिटी के बाहर तंबू लगाकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कॉलेज मालिकों का कहना है कि उन्होंने कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए आवेदन किया, लेकिन यूनिवर्सिटी ने कोई निर्णय नहीं लिया। ऐसे में उन्हें अनुमत विद्यार्थियों से ज्यादा को प्रवेश देना पड़ा। प्रति वर्ष इस तरह की समस्या खड़ी होती है। यूनिवर्सिटी प्रशासन नरम रुख अपनाते ही विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल होने की स्वीकृति दे देता है। लेकिन यह पहला अवसर है, जब यूनिवर्सिटी ने हठधर्मिता कर रखी है। सरकार का उद्देश्य भी उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना है। जिन विद्यार्थियों ने साल भर कॉलेज में पढ़ाई की है, उन्हें यदि वार्षिक परीक्षा में शामिल नहीं किया जाएगा तो फिर उच्च शिक्षा को बढ़ावा कैसे मिलेगा?
दबाव में नहीं आएगा प्रशासन:
हाईकोर्ट में सुनवाई टलने और यूनिवर्सिटी के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू होने के बाद कुलपति ओम थानवी ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन किसी भी दबाव में नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि धरना प्रदर्शन में राजनीति नजर आ रही है। ऐसे ही लोग अब तक यूनिवर्सिटी में नियम विरुद्ध काम करवाते रहे, लेकिन अब नियमों के अनुसार ही काम होगा। कॉलेज मालिकों को अतिरिक्त विद्यार्थियों की जुर्माना राशि जमा करानी पड़ेगी। थानवी ने कहा कि धरना प्रदर्शन के पीछे एक राजनीतिक दल के लोग सक्रिय नजर आ रहे हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि विगत दिनों भाजपा के सांसद भागीरथ चौधरी, वरिष्ठ नेता ओंकार सिंह लखावत, विधायक वासुदेव देवनानी, रामस्वरूप लांबा व पूर्व जिला अध्यक्ष बीपी सारस्वत ने राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात कर कुलपति थानवी पर यूनिवर्सिटी में राजनीति करने का आरोप लगाया था।

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