दरिंदगी के विरोध में जब अन्य बालिकाएं मिलने पहुँची तो अलवर के जिला कलेक्टर नन्नूमल पहाडिय़ा ने किया ऐसा बर्ताव ।

दरिंदगी के विरोध में जब अन्य बालिकाएं मिलने पहुँची तो अलवर के जिला कलेक्टर नन्नूमल पहाडिय़ा ने किया ऐसा बर्ताव ।

अलवर के जिला कलेक्टर नन्नूमल पहाडिय़ा छह माह बाद रिटायर होने वाले हैं और खटूमर व बैर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लडऩा चाहते हैं, इसलिए ।मूक बधिर बालिका के साथ दरिंदगी के मामले में कांग्रेस के पदाधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं।

राजस्थान के बहुचर्चित मूक बधिर बालिका के साथ दरिंदगी के प्रकरण में अलवर के जिला कलेक्टर नन्नूमल पहाडिय़ा सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी की तरह बर्ताव कर रहे हैं। पहाडिय़ा चाहते हैं कि इस प्रकरण को लेकर अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ कोई विरोध नहीं हो। पीडि़ता के बयान सामने आने से पहले ही कलेक्टर पहाडिय़ा ने गैंगरेप के आरोपों से इंकार कर चुके हैं। इतना ही नहीं जब पीडि़ता के समर्थन में स्कूल की बालिकाएं विरोध जताने के लिए गई तो पहाडिय़ा ने कलेक्टर पद की गरिमा के विपरीत बालिकाओं को बेइज्जत कर भगा दिया। सवाल उठता है कि नन्नूमल पहाडिय़ा आखिर कांग्रेस के पदाधिकारी की तरह बर्ताव क्यों कर रहे हैं? असल में पहाडिय़ा कलेक्टर के पद से आगामी जुलाई माह में रिटायर हो रहे हैं। पहाडिय़ा रिटायरमेंट के बाद अलवर जिले की खटूमर और भरतपुर जिले की बैर विधानसभा सीट से चुनाव लडऩे के इच्छुक हैं। ये दोनों विधानसभा भरतपुर संसदीय क्षेत्र में आती है। पहाडिय़ा का पैतृक पथाना खटूमर में आता है। पहाडिय़ा को कांग्रेस का टिकिट चाहिए, इसलिए कांग्रेस सरकार के प्रति वफादारी दिखाने में पहाडिय़ा कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। पहाडिय़ा राज्य प्रशासनिक सेवा से पदोन्नत होकर आईएएस बने हैं। इसे मुख्यमंत्री की मेहरबानी ही कहा जाएगा कि तीन वर्ष में पहाडिय़ा लगातार चौथे जिले के कलेक्टर बने हैं। अलवर में नियुक्त होने से पहले पहाडिय़ा धौलपुर, करौली और सवाई माधोपुर के कलेक्टर रह चुके हैं। पहाडिय़ा की कांग्रेस सरकार के प्रति वफादारी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 15 वर्षीय मूक बधिर बालिा का अपने प्राइवेट पार्ट की सर्जरी करने के बाद जयपुर के जेके लोन अस्पताल में इलाज करवा रही है, लेकिन कलेक्टर पहाडिय़ा अलवर में बैठ कर रेप के आरोपों से इंकार कर रहे हैं, जबकि 11 जनवरी को जब मूक बधिर बालिका अलवर शहर में लहूलुहान हालात में मिली थी, तब गैंगरेप की बात तो पुलिस भी मान रही थी। तीन दिन तक पूरे प्रदेश में हंगामा होता रहा, तब किसी ने नहीं कहा कि बालिका के साथ रेप नहीं हुआ है। लेकिन 14 जनवरी को कलेक्टर पहाडिय़ा ऐसी थ्यौरी निकाल कर लाए जिससे यह साबित किया जा सके कि बालिका के साथ रेप नहीं हुआ है। कलेक्टर वो ही तर्क दे रहे हैं जिससे दरिंदगी का मामला कमजोर हो। कांग्रेस और मुख्यमंत्री के प्रति वफादारी दिखाने के लिए पहाडिय़ा उन बालिकाओं को भी धमका रहे हैं जो पीडि़ता के समर्थन में खड़ी हो रही हैं। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने पीडि़ता की माताजी से फोन पर बात की है। मां को मदद का भरोसा भी दिलाया है। यदि प्रियंका गांधी को वाकई पीडि़ता को न्याय दिलवाना है तो नन्नूमल पहाडिय़ा को अलवर के कलेक्टर के पद से हटवाना होगा। पहाडिय़ा के कलेक्टर रहते हुए मामले की निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।

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