वित्त मंत्री ने घोषणा की कि बीमा क्षेत्र के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा को 74% से बढ़ाकर 100% किया जाएगा। यह सुविधा उन कंपनियों के लिए उपलब्ध होगी जो भारत में संपूर्ण प्रीमियम का निवेश करेंगी। साथ ही, विदेशी निवेश से जुड़ी मौजूदा सीमाओं और प्रतिबंधों की समीक्षा कर उन्हें सरल बनाया जाएगा।
पेंशन उत्पादों के विकास और विनियमित समन्वय के लिए एक विशेष फोरम के गठन की घोषणा की गई। इससे पेंशन क्षेत्र में बेहतर विनियमन और उत्पाद नवाचार की संभावनाएं बढ़ेंगी।
श्रीमती सीतारमण ने कहा कि केवाईसी प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2025 में संशोधित केंद्रीय केवाईसी रजिस्ट्री का शुभारंभ किया जाएगा। इसके तहत आवधिक अद्यतनीकरण के लिए सुव्यवस्थित प्रणाली लागू की जाएगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि कंपनियों के विलय की त्वरित स्वीकृति के लिए प्रक्रियाओं को तर्कसंगत बनाया जाएगा। शीघ्र विलय की प्रक्रिया के दायरे में विस्तार कर इसे अधिक सरल बनाया जाएगा।
सतत विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए वर्तमान मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधियों (बीआईटी) का पुनरुद्धार किया जाएगा ताकि इन्हें निवेशक अनुकूल बनाया जा सके।
वित्त मंत्री की इन घोषणाओं को देश की आर्थिक व्यवस्था में नए सुधारों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन पहलों से वित्तीय क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।
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