नई दिल्ली: अपने बड़बोले अंदाज के लिए मशहूर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 15 मई को एक बड़ा बयान दिया है, जिससे भारत में विपक्षी दल कांग्रेस का एक अहम मुद्दा कमजोर पड़ गया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए कोई मध्यस्थता नहीं की, बल्कि सिर्फ दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने में मदद की।
ट्रंप ने कहा कि जब दोनों देशों के बीच मिसाइलें चलने लगीं, तो उन्होंने उन्हें रुकवाया और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि दोनों देशों में शांति बनी रहे। उनके इस बयान से कांग्रेस का वह दावा खारिज हो गया है, जिसमें पार्टी ने आरोप लगाया था कि भारत ने अमेरिका के दबाव में पाकिस्तान के साथ युद्ध विराम किया।
कांग्रेस ने ट्रंप के पहले के एक बयान को आधार बनाकर संसद के विशेष सत्र की मांग की थी। पार्टी का कहना था कि प्रधानमंत्री को संसद में सरकार की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। कांग्रेस के नेता लगातार सरकार पर हमलावर थे, लेकिन अब ट्रंप के ताजा बयान के बाद कांग्रेस का यह मुद्दा बेदम हो गया है।
गौरतलब है कि चार दिनों की सैन्य कार्रवाई में भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया था। यह पहला अवसर था जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों को मारा था। भारत की इस सैन्य दक्षता की दुनिया भर में प्रशंसा हुई, लेकिन भारत में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने सेना पर ही सवाल उठाए।
ट्रंप के ताजा बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि युद्ध विराम पाकिस्तान की पहल पर हुआ था। भारत ने जिस उद्देश्य के साथ सैन्य कार्रवाई शुरू की, वह उद्देश्य पूरा होने के बाद ही युद्ध विराम पर सहमति बनी। इससे यह भी साफ हुआ कि भारत ने किसी के दबाव में युद्ध विराम नहीं किया था।
ट्रंप के इस बयान ने कांग्रेस के उस दावे को भी खारिज कर दिया है, जिसमें पार्टी ने सरकार पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव में झुकने का आरोप लगाया था। अब कांग्रेस के लिए इस मुद्दे को आगे बढ़ाना मुश्किल होगा।
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