ईवीएम पर कांग्रेस को उमर अब्दुल्ला की नसीहत, जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा जल्द दिलाने की उम्मीद
नई दिल्ली/श्रीनगर, 16 दिसंबर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस के ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) विरोधी अभियान पर तीखा प्रहार करते हुए इसे गैर-जरूरी बताया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को ईवीएम पर दोषारोपण बंद करना चाहिए और हार-जीत को स्वाभाविक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के रूप में स्वीकार करना चाहिए। साथ ही, उमर ने यह भी स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर केंद्र सरकार के साथ कोई टकराव नहीं है, बल्कि वह केंद्र से इस वादे को जल्द पूरा करने की उम्मीद कर रहे हैं।
हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के कई नेताओं ने ईवीएम पर सवाल उठाए थे। यहां तक कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने संसद में कहा था कि यदि मतपत्र के जरिए चुनाव कराया जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा, "जब कांग्रेस के 100 सांसद लोकसभा चुनाव जीतते हैं, तो ईवीएम सही मानी जाती है और राज्यों में हार के बाद इसे दोषी ठहराया जाता है। यह दोहरा रवैया अब खत्म होना चाहिए।" उमर ने कांग्रेस को स्पष्ट संदेश दिया कि ईवीएम पर रोना-धोना बंद करके हार के वास्तविक कारणों पर आत्ममंथन करना चाहिए।
उमर के बयान से यह भी स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस के अन्य सहयोगी दल, जैसे नेशनल कॉन्फ्रेंस, भी ईवीएम को लेकर उसके आरोपों से सहमत नहीं हैं। चुनाव आयोग ने भी कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न हुए। आयोग ने यह भी दोहराया कि हर मतदाता ईवीएम पर वोट डालने के बाद वीवीपैट से देख सकता है कि उसका वोट किसे गया है।
उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में कहा कि उनकी पार्टी और सरकार इस मामले पर केंद्र के साथ टकराव नहीं चाहती। उन्होंने याद दिलाया कि जब 2019 में जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया था, तब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि हालात सामान्य होने पर इसे फिर से राज्य का दर्जा दिया जाएगा।
उमर ने कहा, "हमें उम्मीद है कि केंद्र सरकार जल्द ही अपना वादा निभाएगी। जम्मू-कश्मीर में शांति स्थापित हो चुकी है और हाल ही में विधानसभा चुनाव भी शांतिपूर्ण तरीके से हुए हैं। यह समय है कि केंद्र सरकार राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया शुरू करे।"
दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह मामला जम्मू-कश्मीर से पूरी तरह अलग है। उन्होंने कहा, "दिल्ली शुरुआत से ही केंद्र शासित प्रदेश रही है, जबकि जम्मू-कश्मीर 2019 से पहले तक एक पूर्ण राज्य था।"
उमर अब्दुल्ला के बयान ने ईवीएम पर कांग्रेस के आरोपों को कमजोर करने के साथ-साथ यह भी संकेत दिया कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए उनकी सरकार केंद्र सरकार के साथ सकारात्मक संवाद की उम्मीद रखती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर कब और कैसे कार्रवाई करती है।
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