नई दिल्ली: दिल्ली स्थित जेएनयू में एक बार फिर हिंसा की घटना सामने आई है। 12 दिसंबर को जब एबीवीपी के छात्र गुजरात के साबरमती कांड पर बनी फिल्म 'द साबरमती' देख रहे थे, तब वामपंथी विचारधारा वाले छात्रों ने पथराव कर दिया।
सनातन संस्कृति और लोकतंत्र पर सवाल
यह घटना सनातन संस्कृति और लोकतंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक ओर जहां भारत में सनातन संस्कृति का लंबा इतिहास रहा है और लोकतंत्र मजबूत हो रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ तत्व ऐसे भी हैं जो हिंसा और अराजकता का सहारा ले रहे हैं।
विचारधारा का टकराव
जेएनयू में हुई यह घटना दो विचारधाराओं के बीच टकराव का एक उदाहरण है। एक ओर जहां एबीवीपी के छात्र इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय को समझना चाहते थे, वहीं दूसरी ओर वामपंथी छात्रों ने इस पर आपत्ति जताई।
संविधान की आड़ में हिंसा
यह भी गौर करने वाली बात है कि जो लोग संविधान की बात करते हैं, वही संविधान के मूल्यों का उल्लंघन कर रहे हैं। हिंसा का रास्ता अपनाकर वे लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं।
राजनीति का असर
देश में चल रही राजनीति का भी इस तरह की घटनाओं पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। कांग्रेस के साथ गठबंधन करने वाले कुछ राजनीतिक दल सनातन संस्कृति को ही नष्ट करने की बात कर रहे हैं।
निष्कर्ष
जेएनयू में हुई यह घटना एक चिंताजनक संकेत है। हमें इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए मिलकर काम करना होगा। हमें सनातन संस्कृति और लोकतंत्र के मूल्यों को संरक्षित करना होगा।
यह घटना हमें निम्नलिखित बातों पर विचार करने के लिए मजबूर करती है:
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