नई दिल्ली, 30 दिसंबर: साइबर फ्रॉड की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सरकार ने फर्जी सिम कार्ड धारकों और साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की तैयारी कर ली है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने नए सिम कार्ड नियमों को लागू करते हुए ऐसे व्यक्तियों को तीन साल तक सिम कार्ड जारी करने पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।
सरकार ने ट्राई (TRAI) के सहयोग से नए नियम लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य फर्जी कॉल और एसएमएस के जरिए होने वाले धोखाधड़ी के मामलों पर अंकुश लगाना है। अब उन लोगों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा जो दूसरों के नाम पर सिम कार्ड लेते हैं या फेक मैसेज भेजते हैं।
नए प्रावधानों के तहत, फर्जी सिम कार्ड उपयोगकर्ताओं को छह महीने से तीन साल तक सिम कार्ड लेने से प्रतिबंधित किया जाएगा। ऐसे व्यक्तियों के नामों की एक ब्लैकलिस्ट बनाई जाएगी, जिसे सभी दूरसंचार ऑपरेटरों के साथ साझा किया जाएगा। इसके तहत:
सरकार द्वारा सूची में शामिल व्यक्तियों को नोटिस जारी किया जाएगा। उन्हें सात दिनों के भीतर जवाब देने का मौका मिलेगा। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो ऐसे लोगों के सिम कार्ड ब्लॉक कर दिए जाएंगे और उन्हें नया कनेक्शन लेने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
सार्वजनिक हित में, सरकार बिना किसी पूर्व सूचना के भी कार्रवाई कर सकती है। इन नियमों को नवंबर 2024 में घोषित किया गया था और 2025 से इनका सख्ती से पालन किया जाएगा।
इन नियमों का उद्देश्य साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाना और फर्जी सिम कार्ड के जरिए होने वाले अपराधों पर रोक लगाना है। सरकार का मानना है कि यह कदम मोबाइल उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित संचार अनुभव प्रदान करेगा।
निष्कर्ष:
साइबर अपराधों पर नकेल कसने के लिए सरकार ने जो सख्त कदम उठाए हैं, वे मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षा का नया मानक तय करेंगे। हालांकि, जिन लोगों का नाम ब्लैकलिस्ट में आएगा, उन्हें आगामी तीन वर्षों तक सिम कार्ड के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
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