Operation Sindoor: भारतीय सेना के 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान का साथ देने वाले तुर्की के खिलाफ भारत में विरोध की लहर तेज होती जा रही है। पहले दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के बाद अब हैदराबाद स्थित मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (MANUU) ने भी तुर्की से अपने शैक्षणिक संबंधों को समाप्त कर लिया है।
दरअसल, MANUU ने जनवरी 2024 में तुर्की के युनुस एमरे संस्थान के साथ एक शैक्षणिक समझौता (MoU) किया था। इस समझौते के तहत विश्वविद्यालय के भाषा विभाग में तुर्की भाषा में डिप्लोमा कोर्स शुरू किया गया था और इस पाठ्यक्रम को पढ़ाने के लिए तुर्की से एक अतिथि प्रोफेसर को आमंत्रित किया गया था।
हालांकि, 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान तुर्की द्वारा पाकिस्तान का समर्थन करने के बाद भारत में तुर्की के प्रति गहरा आक्रोश फैल गया। इसी कड़ी में, जेएनयू ने बुधवार को तुर्की की इनोनू यूनिवर्सिटी के साथ हुए अपने तीन साल के MoU को निलंबित कर दिया था। इसके अगले ही दिन, जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी ने भी तुर्की सरकार से जुड़े सभी संस्थानों के साथ किए गए समझौतों को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने की घोषणा कर दी थी।
अब, MANUU ने भी इस कड़ी में शामिल होते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया है। विश्वविद्यालय ने बताया कि भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और तुर्की द्वारा पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों का समर्थन करने के विरोध में युनुस एमरे संस्थान के साथ किए गए शैक्षणिक समझौते को रद्द कर दिया गया है। इसके साथ ही, विश्वविद्यालय ने तुर्की से आए प्रोफेसर को भी वापस भेज दिया है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, MANUU ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा है कि यह निर्णय भारत की संप्रभुता और सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए लिया गया है।
गौरतलब है कि साल 2023 में तुर्की में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान भारत ने उदारतापूर्वक आर्थिक मदद पहुंचाई थी। इसके बावजूद, 'ऑपरेशन सिंदूर' में तुर्की का पाकिस्तान के आतंकवाद का साथ देना भारत में व्यापक नाराजगी का कारण बना। स्वदेशी जागरण मंच जैसे संगठनों ने तुर्की के उत्पादों और पर्यटन का बहिष्कार करने की अपील की है। इस विरोध का असर भी दिखने लगा है, हाल ही में गाजियाबाद के व्यापारियों ने तुर्की से मंगाए जाने वाले फलों के ऑर्डर रद्द कर दिए थे, और गुजरात समेत अन्य राज्यों के व्यापारी भी तुर्की के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं।
दिल्ली से हैदराबाद तक शैक्षणिक संस्थानों द्वारा उठाए गए इस कदम को आतंकवाद के खिलाफ भारत के कड़े रुख और उन देशों को कड़ा संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवाद का समर्थन करते हैं।
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