भारत का अमृत महोत्सव

भारत का अमृत महोत्सव

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अर्जित उपलब्धियों पर वेबिनारों की श्रृंखलाः भारत का अमृत महोत्सव

भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने की यादगार के तौर पर केंद्र सरकार, ‘भारत का अमृत महोत्सव’ का आयोजन कर रही है। इस आयोजन के तहत पिछले 75 वर्षों के दौरान नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने क्या-क्या उपलब्धियां अर्जित की हैं, इसके विषय में कार्यक्रम किये जा रहे हैं। मंत्रालय ने नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा की उपलब्धियों पर वेबिनारों की एक पूरी श्रृंखला का आयोजन किया है। ये वेबिनार 15 मार्च, 2021 को शुरू हुये हैं और 75 सप्ताह तक चलते रहेंगे।

एक अप्रैल, 2021 को “भारत में सौर पार्क” विषय पर एक वेबिनार हुआ। इस वेबिनार में देश में सौर पार्कों के विकास के बारे में चर्चा की गई। इस आयोजन में लगभग 350 लोगों ने हिस्सा लिया। पैनल में शामिल वक्ताओं ने इस विषय पर अनुभव साझा किये और मुख्य चुनौतियों के बारे में चर्चा की।

बायो-गैस संयंत्र निर्माताओं/विकासकर्ताओं के साथ बातचीत करने के लिये एक वेबिनार का आयोजन 12 अप्रैल, 2021 को किया गया। इसमें देश में बायो-गैस के विकास का जायजा लिया गया। वेबिनार में नई प्रौद्योगिकियों पर चर्चा की गई। इस दौरान यह भी गौर किया गया कि इस क्षेत्र में किसे-कहां कामयाबी मिली है। बायो-गैस कार्यक्रम की बढ़ती चुनौतियों पर भी विचार किया गया।

एक वेबिनार 16 अप्रैल, 2021 को आयोजित किया गया था, जिसका विषय “सौर ऊर्जा में अनुसंधान और नवाचार” था। इसका आयोजन राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (एनआईएसई) ने किया था। यह संस्थान मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्तशासी संस्था है। वेबिनार में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हालिया अनुसंधान और नवाचार, एनआईएसई द्वारा विकसित उत्पादों को बाजार में उतारने जैसे विषयों पर चर्चा की गई। इस आयोजन में लगभग 200 लोगों ने हिस्सा लिया।

एक कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय प्रकाश वोल्टीय अनुसंधान एवं शिक्षा केंद्र (एनसीपीआरई), आईआईटी-बॉम्बे ने 26 अप्रैल, 2021 को किया था। यह आयोजन नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की पहल पर किया था। कार्यशाला का विषय “प्रकाश वोल्टीय अनुसंधान एवं विकास विजन 2026: सरकार, उद्योग और एनसीपीआरई की भूमिका” था।इस कार्यशाला का लक्ष्य ऐसे विचारों को सामने लाना था, जिन्हें अमल में लाया जा सके। इसके साथ यह भी देखना था कि नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, एनसीपीआरई और उद्योग साथ मिलकर कैसे अगले दशक में ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सहयोग कर सकते हैं।एक कार्यशाला केवल आमंत्रितों के लिये आयोजित की गई। इसे पांच सत्रों में बांटा गया था और इसमें नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अफसरान, आईआईटी-बॉम्बे के कई फैकल्टी सदस्यों और उद्योग के 43 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। हर सत्र में एनसीपीआरई फैकल्टी द्वारा प्रेजेंटेशन दिया गया कि अनुसंधान और विकास के बारे में वे आगे क्या देखते हैं। इसके अलावा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा हुई और फिर सवाल-जवाब का का दौर चला। इस कार्यशाला के बाद के सत्रों में साई वेफर्स (यह ऊर्जा सम्बंधी एक कंडक्टर होता है, जो सिलीकॉन क्रिस्टल से बनता है) का निर्माण, सेल और उपकरण का निर्माण तथा परीक्षण, पी.वी. मॉड्यूल्स (फोटो वोल्टीय मॉड्यूल्स) और बीओएम घटकों (जिसमें सामग्री का पूरा हिसाब-किताब होता है), बिजली संयंत्रों का अगली पीढ़ी में विकास, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रिड एकीकरण प्रौद्योगिकियों के निर्माण के बारे में बात हुई।

उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने जरूरतों, क्षेत्रों और विशिष्ट प्रौद्योगिकी सेक्टरों पर चर्चा की, जिनके सिलसिले में वे एनसीपीआरई के साथ सहयोग करना चाहते हैं। उद्योग जगत ने इस बात पर भी जोर दिया कि उपकरणों को चलाने के लिये कौशल विकास कार्यक्रमों की जरूरत है, ताकि कार्यरत लोगों का कौशल बढ़े और वे उत्कृष्ट प्रौद्योगिकियों से परिचित हो सकें।

‘धान की भूसी आधारित बायोगैस प्रौद्योगिकी और उसका कार्यान्वयन’ विषय पर एक वेबिनार का आयोजन पांच मई, 2021 को किया गया। यह आयोजन राष्ट्रीय जैव-ऊर्जा संस्थान (एनआईबीई) ने किया, जो मंत्रालय के अधीन एक स्वायतशासी संस्थान है। इसमें जर्मनी की संस्था जर्मन आरई-टेक ने सहयोग किया था। भारत और जर्मनी के 20 से अधिक तकनीकी विशेषज्ञों ने धान की भूसी आधारित बायो-गैस प्रौद्योगिकी और उसकी चुनौतियां पर चर्चा की तथा इस क्षेत्र में अपने-अपने अनुभवों को साझा किया। अपशिष्ट से ऊर्जा कार्यक्रम के तहत मंत्रालय की उपलब्धियों पर भी चर्चा की गई। नीति और नियमों को भारत और जर्मनी द्वारा दिये जाने वाले समर्थन पर भी गौर किया गया।

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