एग्रीकल्चर वेस्ट से तैयार होने वाले इथेनॉल को 20 प्रतिशत तक पेट्रोल डीजल में मिलाया जाएगा। इससे देश के किसानों को ही फायदा होगा।

एग्रीकल्चर वेस्ट से तैयार होने वाले इथेनॉल को 20 प्रतिशत तक पेट्रोल डीजल में मिलाया जाएगा। इससे देश के किसानों को ही फायदा होगा।

एग्रीकल्चर वेस्ट से तैयार होने वाले इथेनॉल को 20 प्रतिशत तक पेट्रोल डीजल में मिलाया जाएगा। इससे देश के किसानों को ही फायदा होगा।
विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जैविक खेती पर जोर दिया।
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5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इथेनॉल सेक्टर का रोडमैप जारी किया। इस अवसर पर आयोजित समारोह को वर्चुअल तकनीक से संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश में 2014 तक इथेनॉल की मात्र एक प्रतिशत ब्राउडिंग होती थी जो अब बढ़कर 5 प्रतिशत हो गई है। यही वजह है कि मौजूदा समय में 21 हजार करोड़ रुपए इथेनॉल खरीदा गया है। मेरी सरकार ने वर्ष 2030 तक पेट्रोल डीजल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिक्स करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन देश में जिस तेजी से पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ गई है, उसे देखते हुए लक्ष्य की अवधि को पांच कम कर दिया गया है। यानी अब 2025 तक ही पेट्रोल डीजल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिक्स कर दिया जाएगा। मोदी ने कहा कि सब जानते हैं कि इथेनॉल का उत्पादन एग्रीकल्चर वेस्ट से होता है। अब तक सिर्फ गन्ने से ही एथेनॉल बनाया जा रहा था, लेकिन अब खराब हुए अनाज और अन्य कृषि सामग्री से एथेनॉल बनाया जा रहा है। इसके लिए देश में प्लांट लगाए जा रहे हैं। जब पेट्रोल डीजल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिक्स होगा, तो इसकी खरीद का अंदाजा लगाया जा सकता है। मोदी ने कहा कि इसका फायदा सीधे तौर पर किसानों को होगा। मोदी ने जैविक खेती पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोगों का रुझान जैविक खेती से तैयार उत्पादों की ओर लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने माना कि दुनिया भर में क्लाइमेट चेंज हो रहा है उसका असर भी भारत पर पड़ रहा है। लेकिन भारत ऐसी चुनौतियों का सामना करने को तैयार है। एक ओर एग्रीकल्चर वेस्ट से इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाया जा रहा है, तो दूसरी ओर सौर ऊर्जा को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। गुजरात में हाइब्रिड एनर्जी पार्क का निर्माण तेजी से हो रहा है। बिजली के लिए कोयला प्लांटों पर निर्भरता कम की जा रही है। सौर ऊर्जा का जितना उपयोग होगा, उतना पर्यावरण शुद्ध होगा। मोदी ने कहा कि हमारे देश में ग्रामीण महिलाएं चूल्हे में करोड़ों टन लकडिय़ां जलाती रही, जिससे जहरीली गैसें निकलती थी, इससे घर परिवार का वातावरण तो दूषित होता ही था, साथ ही गांव कस्बे के पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर पड़ता था। लेकिन अब करोड़ों घरों में उज्ज्वला योजना के अंतर्गत रसोई गैस पहुंच गई है। अब ग्रामीण क्षेत्र की अधिकांश महिलाओं को भी चूल्हे पर भोजन नहीं बनाना पड़ता। मोदी ने कहा कि देश में जंगलों का दायरा भी बढ़ाया है और बाघों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। सरकार इकोनॉमी और इकोलॉजी की नीति को साथ लेकर चल रही है। कचरे से कंचन अभियान में रीसाइक्लिंग के कार्य में नई तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। समारोह में मोदी ने कुछ राज्यों के किसानों से भी संवाद किया। किसानों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने किस प्रकार से अपने खेत में बदलाव किए हैं।

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