दौसा -खसर जिले के गीजगढ कस्बे से हैं-
कोरोना संक्रमण की चेन तोडने के लिए सरकार पूरी तरह प्रयासरत है। ताकि किसी भी तरह इस महामारी की लड़ाई से जंग जीत सके। लेकिन झोलाछाप व डायग्नोस्टिक सैंटर वालों को मिली पनाह व के चलते यह लोग सरकार की उम्मीद पर पानी फेरते नजर आ रहे हैं।
कस्बे सहित क्षेत्र पहले तो झोलाछाप नीम-हकीम ही इस धंधे में लिप्त थे। लेकिन अब स्वस्थ विभाग की उदासीनता को देखकर डायग्नोस्टिक सैंटर चलाने वाले भी इस धंधे में जमकर हाथ अजमा रहे है। तथा विभाग सब कुछ जानने के बाद भी अनजान बना हुआ है।
कस्बे के बस स्टैंड के पास एक डायग्नोस्टिक सैंटर पर गुरूवार सुबह मरीजों की लाइन लगी रहीं। इस दौरान कुछ मरीजों को दुकान के बाहर लिटाकर ड्रीप चढ़ाकर बेझिझक इलाज किया जा रहा था। ऐसे लोग कुछ लालच के चक्कर में रोग को और बढावा दे रहे हैं।
गौर करने वाली बात तो यह है कि कस्बे में एक झोलाछाप की क्लीनिक पर कुछ दिन पहले विभाग से परे हटकर तहसीलदार की कार्रवाई के दौरान दुकान पर प्रतिबंधित दवाओं का भंडार मिलने पर दुकान को सील कर दिया था। बाद में विभाग ने झोलाछाप पर क्या कार्रवाई की इस बात को लेकर प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है। तथा इसके बावजूद भी झोलाछाप हरकतों से बाझ नहीं आ रहे हैं।
महामारी के दौर में कस्बे सहित क्षेत्र में पाँव-पसारे झोलाछाप बेझिझक होकर इलाज कर रहे हैं तथा पनाह मिलने कारण कई अवैध डायग्नॉस्टिक सेंटर भी बेखौफ होकर जांच करने में जुटे हुए हैं।
कस्बे में गत दिनों कोरोना संक्रमित से एक महिला व एक पुरूष की मौत हो गई वहीं सैकड़ों लोग संक्रमित की चपेट आ चुके है। फिर भी विभाग चुप्पी साधे हुआ है।
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