देशव्यापी लॉकडाउन के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजनीतिक पहल करें।

देशव्यापी लॉकडाउन के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजनीतिक पहल करें।

देशव्यापी लॉकडाउन के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजनीतिक पहल करें।
ममता बनर्जी से लेकर तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर तक से गहलोत संवाद कर सकते हैं। कोरोना संक्रमण को देखते हुए देशव्यापी लॉकडाउन जरूरी है।
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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत देश के एकमात्र मुख्यमंत्री हैं जो लगातार देशव्यापी लॉकडाउन की मांग कर रहे हैं। गहलोत का मानना है कि राज्यों द्वारा लगाया जा रहा लॉकडाउन प्रभावी नहीं है। मुख्यमंत्रियों के अपने अपने नजरिए से लॉकडाउन लगाया है। देश में कोरोना संक्रमण की जो स्थिति है उसे देखते हुए देशव्यापी लॉकडाउन की जरूरत है। 10 मई को भी पिछले चौबीस घंटे में देश में चार लाख से ज्यादा नए संक्रमित दर्ज किए गए हैं, जबकि मौत का आंकड़ा भी चार हजार के पार रहा है। मौजूदा समय में विपक्षी दलों की सरकारों के मुख्यमंत्रियों में राजनीतिक नजरिए से अशोक गहलोत का कद काफी बड़ा है। देशव्यापी लॉकडाउन के लिए विपखी सरकारों के मुख्यमंत्रियों के बीच गहलोत ही सर्वसम्मति बनवा सकते हैं। सीएम गहलोत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मो से चाहे जितनी बार मांग कर लें, लेकिन जब तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, तेलंगाना के केसीआर आदि सहमत नहीं होंगे, तब तक देशव्यापी लॉकडाउन नहीं लग सकता। गहलोत में वो राजनीतिक चतुराई है, जिसके अंतर्गत ममता बनर्जी से लेकर केसीआर तक से संवाद कर सकते हैं। गत वर्ष पहली लहर में जब नरेन्द्र मोदी ने देशव्यापी लॉकडाउन लगाया था, तब खुद अशोक गहलोत ने कहा था कि लॉक और अनलॉक के अधिकार राज्यों को मिलना चाहिए। ऐसी मांग करने में ममता बनर्जी भी आक्रामक थीं। इसलिए अब केन्द्र सरकार ने लॉकडाउन के अधिकार राज्यों को दे दिए हैं। राज्य के मुख्यमंत्री ही लॉकडाउन का दायरा तय कर रहे हैं। यह बात अलग है कि राजस्थान में लॉकडाउन लगे चौबीस दिन गुजर गए, लेकिन अभी तक भी लॉकडाउन का असर देखने को नहीं मिला है। उल्टे लॉकडाउन के दौरान संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ी है। 16 अप्रैल को जब लॉकडाउन लगाया गया था, तब प्रतिदिन 6 हजार लोग संक्रमित हो रहे थे, लेकिन 18 हजार लोग प्रतिदिन संक्रमित हो रहे हैं। संक्रमित लोग अस्पतालों के बाहर और अंदर दम तोड़ रहे हैं। इस भयावह स्थिति को देखते हुए ही सीएम गहलोत देशव्यापी लॉकडाउन की मांग कर रहे हैं। लॉकडाउन के 23वें दिन 9 मई को गहलोत ने दो टूक शब्दों में कहा कि कोरोना संक्रमण से बचने का उपाय सरकार के पास नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता के पास है। सात करोड़ लोगों तक कोई मंत्री नहीं पहुंच सकता है। जनता को स्वयं कोरोना से बचना होगा। सीएम का यह बयान सरकार की बेबसी दर्शाता है। मौजूदा समय में जो स्थिति राजस्थान की है, कमोबेश वैसी स्थिति सभी प्रदेशों की है। ऐसे में देशव्यापी लॉकडाउन की सख्त जरुरत है। देशव्यापी लॉकडाउन से संक्रमण पर जल्दी नियंत्रण पाया जा सकता है।

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