डीएसआईआर के सचिव और वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद के महानिदेशक प्रोफेसर शेखर सी मंडे ने एक व्याख्यान में कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी (एसएंडटी) शहरीकरण, स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण जैसी चुनौतियों का समाधान उनमें स्थानीय रूप से जमीनी स्तर पर सुधार लाकर कर सकती है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के एक स्वायत्त संस्थान, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी देहरादून में ‘कंटेम्परेरी चैलेंजेस दैट साइंस एंड टेक्नोलॉजी मस्ट एड्रेस” विषय पर प्रो. एस पी नौटियाल स्मारक व्याख्यान में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि एसएंडटी किसी देश, भारत के संविधान में संजोयी गयी किसी व्यवस्था के विकास में अहम भूमिका निभा सकती है, और वेस्ट मैनेजमेंट, एनर्जी और मोबिलिटी जैसे विभिन्न मुद्दों से निपट सकती है।
“हमें लोगों के प्रवास को रोकने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, चिकित्सा सुविधाओं, शिक्षा आदि के मामले में उन्हें सम्मानजनक रहन सहन प्रदान करना होगा और यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी की उन्नति से पाया जा सकता है” प्रोफेसर मंडे ने डब्लूआईएचजी के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित ऑनलाइन व्याख्यान में कहा। प्रोफेसर मंडे ने व्याख्यान वाडिया इंस्टीट्यूट से दिया।
उन्होंने साथ ही कहा कि भविष्य की महामारियों की भविष्यवाणी के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी को उन्नत करने की जरुरत है और पर्यावरण पर मानवजनित प्रभाव का ध्यान रखा जाना चाहिये। “हम सभी चक्रवात की भविष्यवाणी के लाभों के बारे में जानते हैं और इसलिए हमें विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को कम करने के लिये भविष्यवाणियों की ओर बढ़ना होगा। भविष्य को सुरक्षित बनाना वर्तमान पीढ़ी की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। सही दिशा में सही कदम उठाकर हम अगली पीढ़ी को सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य प्रदान कर सकते हैं।” प्रोफेसर मंडे ने जोर दिया। उन्होंने संग्रहालय और डब्ल्यूआईएचजी की विभिन्न प्रयोगशालाओं का भी दौरा किया।
डब्ल्यूआईएचजी के निदेशक डॉ. कलाचंद सेनने कार्यक्रम में, जिसमें कई वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने भाग लिया, पिछले एक वर्ष में डब्ल्यूआईएचजी द्वारा किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला ।
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